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सचिन करेंगे करियर विकल्पों पर विचार
नई दिल्ली।
‘ग्रोइन’
चोट के कारण
दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ घरेलू श्रृंखला से बाहर बैठने को
मजबूर हुए भारत के सितारा बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर ने संकेत
दिया है कि वे अब अपने करियर विकल्पों पर विचार करेंगे।
हालांकि उन्होंने संन्यास के लिए कोई समय सीमा निर्धारित नहीं
की है।सचिन ने नए समाचार चैनल ‘आईबीएन
लोकमत’ से
कहा, “मैं
इस समय अपने क्रिकेट का मजा ले रहा हूं,
लेकिन मैं भविष्य
के बारे में ज्यादा सोचना नहीं चाहता हूं”।सचिन
ने कहा, “मैं
लगभग 20 वर्षों से लगातार क्रिकेट खेल रहा हूं,
लेकिन फिलहाल मैं
मौजूदा समय पर ध्यान लगाना चाहता हूं”।उन्होंने
कहा, “मैं
बीते समय या भविष्य के बारे में ज्यादा सोचना नहीं चाहता हूं
और मैं श्रृंखला दर श्रृंखला आगे बढ़ता हूं”सचिन
ने कहा कि विश्व कप जीतने का उनका सपना पूरा नहीं हो पाया है।
हालांकि वे 2011 के विश्व कप में भी खेलना चाहेंगे।उन्होंने
कहा, “विश्व
कप जीतने का मेरा सपना पूरा नहीं हो पाया है। मैं इसमें खेलना
चाहता हूं,
लेकिन 2011 अभी
काफी दूर है और मैं उतनी दूर तक देखना नहीं चाहता हूं तथा खुद
को किसी चीज से प्रतिबद्ध नहीं करना चाहता हूं”।संन्यास
के बाद की अपनी योजनाओं के बारे में सचिन ने कहा कि वे क्रिकेट
से जुड़े रहना चाहेंगे।उन्होंने कहा, “मैं
अपने परिवार के साथ समय गुजारना चाहूंगा लेकिन मैं किसी न किसी
रूप से क्रिकेट से जुडे रहना चाहूंगा”।इस
बारे में और पूछे जाने पर उन्होंने ने कहा, “मैं
चैरिटेबल गतिविधियों से जुड़ा रहूंगा। मैं कई चैरिटी से जुड़ा
हुआ हूं,
लेकिन मैं उनके बारे में ज्यादा बात करना पसंद नहीं करता। मैं
किसी न किसी रूप से ऐसे कार्यों से जुड़ा रहता हूं”।आगामी
‘इंडियन
प्रीमियर लीग’ (आईपीएल)
की सराहना करते हुए 34 वर्षीय सचिन ने कहा कि खेल को लोकप्रिय
बनाने के लिए ट्वेंटी-20 जरुरी था।सचिन ने कहा, “पिछले
18-20 वर्षों में खेल में काफी अंतर आए हैं। ट्वेंटी-20
क्रिकेट को बेसबॉल और फुटबॉल जैसा बना रहा है। दर्शकों को पता
है कि मैच तीन घंटे में खत्म हो जाएगा। इससे क्रिकेट को दुनिया
में फैलाने में मदद मिले”।दिग्गज
बल्लेबाज ने कहा, “मुझे
एक शिकायत विदेशियों से मिलती है कि टेस्ट ही नहीं एकदिवसीय
मैच भी काफी लम्बे होते हैं। वे ऐसा खेल पसंद करते हैं जो तीन
घंटे से आगे न जाता हो”।
हालांकि उन्होंने इस बात को सिरे से खारिज कर दिया कि
खिलाड़ियों की नीलामी से क्रिकेट की आत्मा ही नष्ट हो
जाएगी।सचिन ने कहा, “मैं
ऐसा बिल्कुल भी नहीं सोचता। मैं यह सोचकर कभी खेल नहीं खेला कि
मुझे इससे पैसा कमाना है और आज के युवा भी ऐसा नहीं सोचते हैं।
मैंने कई रातें यह सोचकर गुजारी हैं कि मुझे अगले दिन कैसा
खेलना है। इस रोमांच की तुलना पैसे से नहीं की जा सकती”।सचिन
ने कहा,
“शुरुआत
से ही मेरा लक्ष्य हमेशा अच्छा खेलना और ज्यादा से ज्यादा रन
बनाना रहा था। पैसा नहीं बल्कि यह लक्ष्य मेरी प्रेरणा रहा है”।ऑस्ट्रेलिया
में हरभजन सिंह विवाद के बारे में सचिन ने कहा, “मैंने
हरभजन का बचाव किया क्योंकि उन्होंने वह कभी नहीं कहा था जिसका
उनपर आरोप लगाया गया था। मैंने महसूस किया कि यदि हम सभी
खिलाड़ी उस समय उनका बचाव नहीं करते,
तो हम उनसे कभी
कैसे कोई उम्मीद रख पाते। यह हम क्रिकेटरों के लिए ही
महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि ऑस्ट्रेलिया में ही नहीं विदेशों में
रह रहे सभी भारतीयों के लिए महत्वपूर्ण है”।उन्होंने
कहा, “मैंने
इतना ही महसूस किया कि हरभजन टीम साथी हैं जिनका बचाव किया
जाना चाहिए और मुझे इस मामले में पहल करनी चाहिए,
जो मैंने की”।मैदानी
छींटाकशी के लिए सचिन ने कहा कि कुछ हदों का खिलाड़ियों को
ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने कहा, “क्रिकेटरों
को अपनी सीमाओं को लांघना नहीं चाहिए। मैदान पर चीजें घटती
हैं। हर कोई जीतना चाहता है। हमें इसके लिए तैयार रहना चाहिए
लेकिन अपनी हद के अंदर”।सचिन
ने टीम में “सीनियर-जूनियर”
का भेद पैदा करने
के लिए मीडिया की आलोचना की। उन्होंने कहा, “इस
तरह के मतभेदों की खबरें बिल्कुल गलत हैं। टीम में वरिष्ठ और
कनिष्ठ सभी एक-दूसरे का सम्मान करते हैं और हम सभी देश के लिए
खेलने के महत्व को महसूस करते हैं। मीडिया इस तरह की खबरें
देकर अपनी विश्वसनीयता खुद ही नष्ट कर रहा है”।

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