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बाल शोषण और अत्याचार की रोकथाम के लिए बनाबाल अधिकार प्रकोष्ठ
बच्चों पर अत्याचार एवं शोषण की घटनाओं को रोकने तथा बाल
अधिकार संरक्षण के लिए ठोस कार्रवाई सुनिश्चित करने के
उद्देश्य से छत्तीसगढ़ के प्रत्येक जिले में
'बाल अधिकार प्रकोष्ठ'
का गठन किया गया है। यह प्रकोष्ठ पीड़ित बच्चों को समुचित
सहायता एवं संरक्षण दिलाने के साथ-साथ बाल अधिकार उल्लंघन की
घटनाओं की सतत् मानिटरिंग भी करेगा। महिला एवं बाल विकास विभाग
द्वारा यहां मंत्रालय से इस आशय का आदेश जारी कर दिया गया है।विभागीय
अधिकारियों ने आज यहां बताया कि बाल अधिकार प्रकोष्ठ प्रत्येक
जिले के पुलिस थानों में दर्ज बच्चों पर घटित अत्याचारों और
अपराधों की वस्तुस्थिति जानकर घटनाओं की प्रवृत्ति का आंकलन
करेगा। प्रकोष्ठ द्वारा अधिक बाल शोषण की घटनाएं वाले
क्षेत्रों को चिन्हित कर उस क्षेत्र विशेष में इन घटनाओं के
कारण तथा उनके निदान के लिए पंचायती राज संस्थाओं सहित स्थानीय
निकायों और स्वैच्छिक संस्थाओं को भी कार्रवाई करने प्रेरित
किया जाएगा। बच्चों के विरूध्द अपराधों और शोषण के प्रकरणों पर
पुलिस थाने में की गई रिपोर्ट पर तत्परता से कार्रवाई की
समीक्षा भी इस प्रकोष्ठ द्वारा की जाएगी। बाल अधिकार प्रकोष्ठ
द्वारा गत पांच वर्षों में न्यायालयों और किशोर न्यायालयों में
दर्ज प्रकरणों के निपटारे में पुलिस तथा समाज कल्याण विभाग
द्वारा की जा रही कार्रवाई की समीक्षा भी की जाएगी। यह
प्रकोष्ठ जिलों में बाल अधिकार संरक्षण के लिए काम कर रहे सभी
स्वैच्छिक एवं सामाजिक संगठनों द्वारा की जाने वाली कार्रवाई
की जानकारी प्राप्त कर उन्हें यथोचित सलाह,
मार्गदर्शन एवं सहयोग भी प्रदान करेगा।महिला
एवं बाल विकास विभाग द्वारा जारी किए गए आदेश के अनुसार इस बाल
अधिकार प्रकोष्ठ के अध्यक्ष जिला कलेक्टर होंगे। जिले के पुलिस
अधीक्षक,
मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत,
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी,
नगरपालिक निगम के आयुक्त,
मुख्य नगरपालिका अधिकारी,
पंचायत एवं समाज सेवा विभाग के उप संचालक,
आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग के
सहायक आयुक्त, जिला शिक्षा अधिकारी,
सहायक श्रमायुक्त सहित बाल कल्याण के क्षेत्र
में कलेक्टर द्वारा नामांकित दो स्वैच्छिक संगठनों के
प्रतिनिधि एवं एक बाल चिकित्सक व एक अभिभाषक प्रकोष्ठ के सदस्य
होंगे। जिले के जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी को इस
प्रकोष्ठ का सदस्य सचिव बनाया गया है। प्रकोष्ठ में अशासकीय
सदस्यों की कार्यावधि दो वर्ष निर्धारित की गई है।
बाल अधिकार संरक्षण के लिए स्थापित इस प्रकोष्ठ की बैठक माह
में एक बार आयोजित करना अनिवार्य किया गया है। बैठक की
गणपूर्ति आधे से अधिक सदस्यों से होगी। प्रत्येक जिले में
प्रकोष्ठ के अध्यक्ष इन बैठकों की अध्यक्षता करेंगे। अध्यक्ष
की अनुमति से बैठक में अन्य व्यक्तियों,
विशेषज्ञों और संस्था प्रतिनिधियों को बाल
अधिकार उल्लंघन से संबंधित विचार-विमर्श के लिए शामिल किया जा
सकेगा।

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