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ऐसा बैंक जहां पैसों की जगह मिलता है अनाज
राज्य शासन द्वारा हर जरूरत मंद की जरूरतों को ध्यान में रखकर
अनेक कल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही है। इसमें मजदूरों
एवं जरूरतमंदों का भी बखूबी ख्याल रखा जा रहा है और उन्हें
खाद्य सुरक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। पूरे छत्तीसगढ़ के
2 हजार से अधिक दूरस्थ ग्रामों में ग्रेन
बैंकों की स्थापना की गई है जहां पैसों की जगह अनाज मिलता है।
जशपुर जिले में 160 ग्रेन बैंक है। इन
ग्रेन बैंकों से बी.पी.एल., अंत्योदय व
अन्नपूर्णा परिवार को जरूरत के समय ऋण स्वरूप चावल उपलब्ध
कराया जा रहा है। जशपुर जिले में इन बैंकों में 6
हजार चार सौ क्विंटल चावल का भण्डारण किया गया
है।
जशपुर जिले में इसके अलावा
424 उचित मूल्य की दूकानों के माध्यम से
पी.डी.एस. की आवश्यक वस्तुओं के साथ-साथ जैसे
आलू.प्याज.माचिस.कापी. डिटर्जेन्ट आदि भी जरूरतमंद उपभोक्ताओं
को उपलब्ध कराया जा रहा है। एक मई 2007
से आरंभ मुख्यमंत्री खाद्यान्न सहायता योजना के तहत गरीब अथवा
अति गरीब करीब 66 हजार से अधिक
परिवारों को तीन रूपए प्रति किलो की दर से चावल प्रदाय किया जा
रहा है तथा 6 सौ से अधिक परिवारों को
नि:शुल्क चावल दिया जा रहा है। इसके साथ ही 25
हजार से अधिक परिवारों को सवा छ: रूपये प्रति
किलो की दर से चावल उपलब्ध कराया जा रहा है।
सभी बी.पी.एल. परिवारों को
25 पैसे किलो की दर से छत्तीसगढ़ अमृत नमक
उपलब्ध कराया जा रहा है। जिले में इसके अलावा 10
अन्नपूर्णा दाल-भात केन्द्रों के माध्यम से
5 रूपए में भरपेट भोजन की सुविधा भी
उपलब्ध है। इन केन्द्रों की संख्या जिले में विकासखंडवार देखें
तो जशपुर में 3, दुलदुला,
फरसावहार व कांसाबेल विकासखंड में एक-एक तथा
पत्थलगांव में 2 है। वर्तमान में इन
केन्द्रों से जिले में प्रतिदिन लगभग नौ सौ से एक हजार
हितग्राही लाभान्वित हो रहें हैं।

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