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मुख्यमंत्री की उपस्थिति में हुआ ऐतिहासिक समझौता दल्लीराजहरा-
रावघाट-जगदलपुर रेल लाईन कानिर्माण जल्द शुरू होगा
छत्तीसगढ़ की वर्षों पुरानी दल्लीराजहरा-रावघाट- जगदलपुर
ब्रॉडगेज रेल लाईन निर्माण के प्रस्ताव से संबंधित ऐतिहासिक
समझौते पर आज नई दिल्ली में हस्ताक्षर किए गए। इस
बहुप्रतीक्षित रेल लाईन की लम्बाई
235 किलोमीटर और अनुमानित लागत लगभग
968 करोड़ रूपए होगी। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह
की उपस्थिति में नई दिल्ली स्थित रेल भवन के सभा कक्ष में यह
समझौता हुआ। इस अवसर पर रेल मंत्री श्री लालूप्रसाद यादव,
इस्पात एवं खान मंत्री श्री रामविलास पासवान
तथा रेल राज्य मंत्री श्री आर. वेलु सहित छत्तीसगढ़ सरकार और
संबंधित केन्द्रीय मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
समझौता ज्ञापन (एम.ओ.यू) पर छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से मुख्य
सचिव श्री शिवराज सिंह, रेल मंत्रालय
की ओर से रेल्वे बोर्ड अध्यक्ष श्री के.पी.जेना,
भारतीय इस्पात प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री
एस.के.रूंगटा तथा राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (एन.एम.डी.सी.) के
अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक श्री राना सोम ने हस्ताक्षर किए।
डॉ. रमन सिंह ने इस अवसर पर कहा कि इस परियोजना के लिए
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा शासकीय भूमि नि:शुल्क दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि यह परियोजना जहां लौह अयस्क की आपूर्ति में
मददगार बनकर भिलाई इस्पात संयंत्र के लिए संजीवनी का काम करेगी,
वहीं इसके माध्यम से राज्य के आदिवासी बहुल
बस्तर जिले और सम्पूर्ण बस्तर अंचल की जनता को भी सामाजिक
आर्थिक विकास की मुख्यधारा से जुड़ने का अवसर मिलेगा। डॉ. सिंह
ने कहा कि इस परियोजना से बस्तर जैसे आदिवासी बहुल पिछड़े अंचल
में विकास का एक नया युग शुरू होगा और यह परियोजना क्षेत्र के
विकास की जीवन-रेखा भी साबित होगी। उन्होंने इस परियोजना की
सफलता के लिए अपनी शुभकामनाएं दी।
डॉ. रमन सिंह ने कहा कि इस महत्वपूर्ण रेल परियोजना से लौह
अयस्क परिवहन के साथ-साथ राज्य के बस्तर अंचल में वनोपज आधारित
व्यवसाय को भी काफी बढ़ावा मिलेगा। यह रेल लाईन उत्तर को दक्षिण
के राज्यों से जोड़ने के लिए एक वैकल्पिक मार्ग के रूप में भी
काफी सहायक होगी। यह रेल मार्ग खनिज और वन सम्पदा से परिपूर्ण
बस्तर अंचल के विश्व प्रसिध्द हरे-भरे जंगलों से गुजरेगी और
देश-विदेश के सैलानियों को भी आकर्षित करेगी। इससे बस्तर सहित
छत्तीसगढ़ में पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। मुख्यमंत्री ने यह भी
कहा कि यह रेल-लाईन बस्तर अंचल के तीन जिलों-क्रमश: जगदलपुर,
उत्तर बस्तर (कांकेर) नारायणपुर से होकर
निकलेगी। इसके माध्यम से इन तीनों पिछड़े और नक्सल प्रभावित
इलाकों में स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नये अवसर भी पैदा
होंगे। व्यापार-व्यवसाय और वनोपज आधारित लघु एवं कुटीर
उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा। वनवासियों को वनोपजों के लिए बेहतर
बाजार के साथ और भी अधिक लाभदायक कीमतें मिलेंगी।
मुख्यमंत्री ने इस परियोजना में सहयोग के लिए रेल मंत्री श्री
लालूप्रसाद यादव और इस्पात मंत्री श्री रामविलास पासवान को
धन्यवाद दिया। रेल मंत्री श्री लालूप्रसाद यादव ने इस अवसर पर
कहा कि दल्लीराजहरा-रावघाट-जगदलपुर रेल लाईन की परियोजना को
निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि
इसके पूर्ण होने पर छत्तीसगढ़ सहित सम्पूर्ण राष्ट्र के आर्थिक
विकास में तेजी आएगी,
और देश की इस्पात उत्पादन क्षमता में भी
वृध्दि होगी। केन्द्रीय इस्पात मंत्री श्री पासवान ने इस मौके
पर कहा कि इस परियोजना से भिलाई इस्पात संयंत्र को एक लम्बे
समय तक लौह अयस्क की आपूर्ति की जा सकेगी। उन्होंने कहा कि
बस्तर जैसे पिछड़े इलाकों में राष्ट्रीय खनिज विकास निगम के
माध्यम से सामाजिक और शैक्षणिक विकास गतिविधियों के लिए भी
राज्य को मदद की जाएगी।
उल्लेखनीय है कि दल्लीराजहरा से रावघाट होते हुए बस्तर जिले के
मुख्यालय जगदलपुर तक इस रेलमार्ग की लम्बाई
235 किलोमीटर है। परियोजना में
दल्लीराजहरा-रावघाट तक रेल लाईन की लम्बाई 95
किलोमीटर होगी। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह इस
प्रस्ताव को लेकर पिछले तीन वर्षों से लगातार केन्द्र सरकार के
स्तर पर लगातार पहल कर रहे थे। उन्होंने लगभग तीन वर्ष पहले
विगत दो नवम्बर 2004 को नई दिल्ली के
रेल भवन में आयोजित एक विशेष बैठक में इस बहुप्रतीक्षित
रेलमार्ग निर्माण के संशोधित प्रस्ताव पर रेल मंत्री श्री
लालूप्रसाद यादव के साथ विचार-विमर्श किया था। श्री यादव की
अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में दल्लीराजहरा-रावघाट-जगदलपुर
रेल लाईन के संशोधित प्रस्ताव पर भारतीय इस्पात प्राधिकरण,
राष्ट्रीय खनिज विकास निगम तथा रेल्वे बोर्ड
के अध्यक्षों ने भी अपनी सहमति व्यक्त की थी। मुख्यमंत्री
पिछले तीन साल से इस परियोजना की स्वीकृति के लिए लगातार
प्रयास कर रहे थे।
गौरतलब है कि रावघाट में लौह अयस्क के विशाल प्राकृतिक भण्डार
मौजूद हैं,
जोकि वर्तमान दोहन अनुपात की दृष्टि से आगामी
लगभग 80 वर्षों के लिए पर्याप्त हैं,
लेकिन रेल लाईन नहीं होने की वजह से भिलाई
इस्पात संयंत्र तक इसके परिवहन में परेशानी हो रही है। वर्तमान
में भिलाई इस्पात संयंत्र को कच्चे माल के रूप में लौह अयस्क
की आपूर्ति दल्लीराजहरा (जिला दुर्ग) स्थित खदानों से की जा
रही है, लेकिन इन खदानों में भी लौह
अयस्क भण्डार अगले कुछ वर्षों में समाप्त हो जाएंगे। ऐसी
स्थिति में दल्लीराजहरा से रावघाट तक रेल लाईन बनने पर भिलाई
इस्पात संयंत्र को रावघाट से लौह अयस्क की आपूर्ति आसानी से हो
सकेगी। इस दृष्टि से यह रेल लाईन भिलाई इस्पात संयंत्र के लिए
जीवन रेखा भी साबित होगी। यह भी गौरतलब है कि इस रेल परियोजना
के लिए वर्ष 1998 में तत्कालीन
मध्यप्रदेश सरकार, भारतीय इस्पात
प्राधिकरण, रेल मंत्रालय और
एन.एम.डी.सी. के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए थे,
लेकिन किन्हीं कारणों से इस पर अमल नहीं हो
पाया था। छत्तीसगढ़ की प्रथम निर्वाचित सरकार के मुख्यमंत्री
डॉ. रमन सिंह ने इस दिशा में नये सिरे से लगातार पहल करते हुए
राज्य के व्यापक हित में इस परियोजना के लिए केन्द्र सरकार की
स्वीकृति प्राप्त कर ली है।
रेल मंत्री श्री लालूप्रसाद यादव ने इस महीने की
04 तारीख को मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर ग्यारह
दिसम्बर को समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर के लिए रेल भवन में
होने वाले कार्यक्रम में आमंत्रित किया था। आज नई दिल्ली में
हुए इस कार्यक्रम में बताया गया कि दल्लीराजहरा-रावघाट-जगदलपुर
की 235 किलोमीटर ब्रॉडगेज रेल परियोजना
का क्रियान्वयन छत्तीसगढ़ सरकार, भारतीय
इस्पात प्राधिकरण, रेल मंत्रालय तथा
राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (एन.एम.डी.सी.) की संयुक्त भागीदारी
से किया जाएगा। परियोजना की लागत वर्ष 2004-05
के मूल्य पर लगभग 968
करोड़ रूपए होगी। इस परियोजना के लिए 1440
हेक्टेयर जमीन की जरूरत होगी। परियोजना के
प्रथम चरण में दल्लीराजहरा से रावघाट तक 95
किलोमीटर रेल मार्ग निर्माण का सम्पूर्ण खर्च
भारतीय इस्पात प्राधिकरण (सेल) द्वारा वहन किया जाएगा। द्वितीय
चरण में रावघाट से जगदलपुर तक 140
किलोमीटर रेल मार्ग के लिए छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा नि:शुल्क
भूमि उपलब्ध करायी जाएगी और भू-अर्जन के लिए भी आवश्यक व्यय
वहन किया जाएगा। इसके अन्तर्गत रेल्वे बोर्ड द्वारा 376
करोड़ रूपए, भारतीय
इस्पात प्राधिकरण द्वारा 141 करोड़ रूपए,
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा 76
करोड़ रूपए और एन.एम.डी.सी. द्वारा 70
करोड़ रूपए खर्च किए जाएंगे।
समझौता ज्ञापन हस्ताक्षर के लिए आयोजित कार्यक्रम में छत्तीसगढ़
सरकार के अपर मुख्य सचिव श्री पी.जॉय ओमेन,
आवासीय आयुक्त श्रीमती निहारिका सिंह,
उद्योग विभाग के संचालक श्री एस.के.बेहार,
मुख्यमंत्री कार्यालय के विशेष कर्तव्यस्थ
अधिकारी श्री विक्रम सिसोदिया और अपर संचालक जनसंपर्क श्री
आलोक अवस्थी भी उपस्थित थे।

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