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गांवों के विकास के लिए अनूठी योजना प्रारंभ होगी

 

उच्च शिक्षा राज्यमंत्री डॉ. कृष्णमूर्ति बांधी ने कहा कि विद्यार्थी भविष्य के नागरिक हैं। इन्हें अपनी सामाजिक भूमिका निभाने के लिए तैयार किया जाना चाहिए। विद्यार्थियों में गांवों की आर्थिक सामाजिक स्थिति, ग्रामीण परिवेश के प्रति समझ तथा संवेदनशीलता पैदा होनी चाहिए। उन्हें गांवों की समस्याओं से भी रूबरू होना चाहिए। उन्हें एक जिम्मेदार नागरिक बनाने तथा उनके जरिये गांवों की आवश्यकताओं के अनुसार विकास करने के लिए शासन ने एक अभिनव योजना बनायी है। यह योजना पूरे देश में अपनी तरह अनूठी है। इस योजना के अनुसार राष्ट्रीय सेवा योजना के विद्यार्थियों के प्रस्ताव के आधार पर शासन द्वारा चयनित ग्राम समूह के विकास कार्यों के लिए दस-दस लाख रूपए दिए जाएंगे। प्रदेश में पहले चरण में सभी जिलों के पचास गांवों को शामिल किया जाएगा। इसके लिए योजना आयोग से सैध्दांतिक सहमति मिल गयी है।

 डॉ. बांधी ने उक्त उद्गार आज यहां ''जनधर्म, ग्रामीण विकास हेतु सूक्ष्म नियोजन एवं सूचना का अधिकार'' विषय पर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला के उद्धाटन के अवसर पर व्यक्त किए। यह कार्यशाला उच्च शिक्षा विभाग तथा राष्ट्रीय सेवा योजना पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर द्वारा आयोजित की गयी है।

 डॉ. बांधी आज यहां बाकायदा शिक्षक की भूमिका में उतर आए और चॉक और ब्लैक बोर्ड के जरिये कार्यशाला के प्रतिभागियों को योजना की केस स्टडी के अनुसार जानकारी दी। लगभग एक घंटे तक उन्होंने गांव का उदाहरण देकर वहां की पानी, बिजली, सड़क की समस्या की समीक्षा और समाधान के बारे में बताया।

 सूक्ष्य नियोजन योजना के तहत विद्यार्थी गांव में दस दिवसीय शिविर में जाकर ग्रामीणों से मिल-जुलकर उनकी समस्याएं जानेंगे तथा गांव की प्राथमिकता तय करेंगे। उस आधार पर वे गांव के विकास के लिए प्रस्ताव तैयार करेंगे। जिसे जिला स्तर पर प्रस्तुत किया जाएगा। उन्होंने कहा कि गांव में अधिकांश समस्याएं आपसी समझदारी से ही निपट सकती हैं। डॉ. बांधी ने कहा कि आने वाले दो साल में इस योजना के जरिये जबरदस्त सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।

 पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. लक्ष्मण चतुर्वेदी ने इस अवसर पर कहा कि युवा पीढ़ी को अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए तैयार करना चाहिए। यह कार्य शिक्षकों द्वारा बखूबी किया जा सकता है। उन्होंने शिक्षक की तुलना दिये से करते हुए कहा कि शिक्षक खुद जलेगा तब ही रोशनी देगा। उन्होंने शिक्षकों से आत्मविवेचना करने का आव्हान किया। राष्ट्रीय सेवा योजना के इस कार्यक्रम के जरिये क्रांतिकारी परिवर्तन लाया जा सकता है। इस योजना को प्रारंभ करने के पूर्व विद्यार्थियों, जिला संगठकों, कार्यक्रम अधिकारियों की भूमिका की विस्तृत समीक्षा की जानी चाहिए, साथ ही इसके दूरगामी परिणामों पर भी विचार किया जाना होगा।

 एन.एस.एस. के राज्य संपर्क अधिकारी डॉ. डी.आर.नायक ने कार्यशाला की रूप रेखा के संबंध में जानकारी दी। कार्यशाला में मुख्य प्रशिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। ये प्रशिक्षक जिलों में जिला कार्यक्रम अधिकारियों को प्रशिक्षण देंगे। कार्यक्रम अधिकारी अंत में एन.एस.एस. के विद्यार्थियों को प्रशिक्षित करेंगे। इस अवसर पर सभी जिलों के एन.एस.एस. के संगठक उपस्थित थे। उल्लेखनीय है कि राज्य की 987 संस्थाओं में 82 हजार से अधिक छात्र-छात्राएं एन.एस.एस. में पंजीकृत हैं।

 

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