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देश के प्रथम पांच आयोगों में शामिल है छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत
नियामक आयोग
छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग ने अपनी स्थापना के सिर्फ
साढ़े तीन वर्ष के भीतर देश के
22 विद्युत नियामक आयोगों के बीच प्रथम पांच
में अपना स्थान बना लिया है। क्रिसिल नामक संस्था द्वारा पिछले
वर्ष किए गए सर्वेक्षण में विनियामक गतिविधियों में प्रदर्शन
की दृष्टि से देश के 22 आयोगों में
छत्तीसगढ़ के आयोग को पांचवे स्थान पर रखा गया था। आयोग के
अध्यक्ष श्री एस.के. मिश्रा ने आज यहां बताया कि राज्य शासन
द्वारा इस आयोग का गठन केन्द्रीय विद्युत अधिनियम 2003
के प्रावधानों के तहत जुलाई 2004
में किया गया था। उन्होंने बताया कि आयोग के
मुख्य कार्यों में बिजली प्रदाय दरों (टैरिफ) का निर्धारण,
विद्युत पारेषण, वितरण
और विद्युत व्यापार के लिए लायसेंस प्रदान करना शामिल है। श्री
मिश्रा ने बताया कि इसके अलावा उपभोक्ताओं के हितों का संरक्षण,
विद्युत मंडल और अन्य लायसेंस धारकों के
विद्युत प्रदाय की गुणवत्ता का मापदण्ड निर्धारित करना तथा
सेवा संबंधित मानकों का निर्धारण भी आयोग के कर्तव्यों में
शामिल है। आयोग द्वारा विद्युत लोकपाल की भी नियुक्ति की गयी
है, जो विद्युत मंडल द्वारा रायपुर,
बिलासपुर और जगदलपुर में गठित विद्युत
उपभोक्ता फोरम के आदेशों के विरूध्द अपीलों की सुनवाई करते
हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि गैर पारम्परिक अथवा वैकल्पिक ऊर्जा
स्त्रोतों से बिजली उत्पादन को प्रोत्साहित करना भी आयोग का एक
महत्वपूर्ण कार्य है। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग पूरी
पारदर्शिता से काम कर रहा है। अपने कार्यक्षेत्र में आने वाले
सभी महत्वपूर्ण विषयों के संबंध में आयोग द्वारा अब तक सोलह
विनियम (रेग्यूलेशन्स) बनाए गए हैं। इनका प्रकाशन राजपत्र में
किया जा चुका है। श्री मिश्रा ने यह भी बताया कि छत्तीसगढ़
विद्युत नियामक आयोग द्वारा अब तक तीन बार बिजली की दरों का
निर्धारण किया गया है और आदेशों के जरिए न केवल बिजली की दरों
के युक्तियुक्तकरण का प्रयास किया गया है,
बल्कि प्रदाय लागत और प्रदाय दर दोनों में कमी
भी लाई गयी है। श्री मिश्रा ने बताया कि आयोग के सामने अब तक
120 याचिकाएं प्रस्तुत की गयी और इनमें
से 109 में अंतिम आदेश भी पारित किए जा
चुके हैं। आयोग द्वारा जारी दो महत्वपूर्ण आदेशें से राज्य में
गैर परम्परागत ऊर्जा स्त्रोतों को भी अच्छा प्रोत्साहन मिलने
लगा है।
श्री मिश्रा ने बताया कि धान के छिलके अथवा भूसे पर आधारित
बिजली घरों के लिए अलग से आदेश पारित कर अनेक सुविधाएं
मुहैय्या कराई गयी है। इसके फलस्वरूप राज्य में इस प्रकार की
15 इकाईयों की स्थापना हो चुकी है,
जिनकी उत्पादन क्षमता लगभग 130
मेगावाट है। लघु जल विद्युत इकाईयों के बारे
में भी आयोग द्वारा जारी सुस्पष्ट दिशा निर्देश जारी किए गए
हैं। विभिन्न उद्योगों द्वारा स्वयं के उपयोग के लिए स्थापित
केप्टिव विद्युत संयंत्रों के लिए भी आयोग ने स्पष्ट
दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके फलस्वरूप आज छत्तीसगढ़ में
लगभग 36 केप्टिव बिजली घर संचालित हो
रहे हैं, जिनमें लगभग दो हजार
100 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है।

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