टैक्स से बचने के लिए चैरिटी शो की आड़ नहीं ली जा सकती.
नई दिल्लीः
सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक फैसले
में कहा है कि यदि फैशन शो के आयोजक स्पष्ट रूप से यह साबित
करने में विफल रहते हैं
कि आयोजन का मकसद चैरिटी है तो ऐसे फैशन शो के लिए एंटरटेनमेंट
टैक्स अदा किया जाना
चाहिए।
जज सी. के. ठक्कर और अल्तमस कबीर की बेंच ने एक फैशन शो के
आयोजकों
पर एंटरटेनमेंट टैक्स लगाने के उत्तर प्रदेश सरकार के आदेश में
दखलअंदाजी से इनकार
करते हुए कहा कि हालांकि टैक्स से बचने के लिए चैरिटी शो की
आड़ नहीं ली जा सकती।
इस मामले में याचिका करने वाले और फैशन शो के
डायरेक्टर-कोरियोग्राफर अमित
कुमार ने जिला गोरखपुर के कलेक्टर द्वारा एंटरटेनमेंट और
जुर्माना लगाए जाने के
फैसले को चुनौती दी थी। अमित कुमार ने नौ जुलाई 2000
को जिले में मिस्टर गोरखपुर और
मिस गोरखपुर प्रतियोगिता का आयोजन किया था।
कुमार ने जिला मजिस्ट्रेट की
अनुमति के बिना सेंट एंड्रयूज इंटर कॉलेज में शो का आयोजन किया
था। जिला मजिस्ट्रेट
ने याचिकाकर्ता पर
43,270
रुपये मंनोरंजन टैक्स तथा 20
हजार रुपये का जुर्माना
लगाया था।
याचिकाकर्ता ने इस आधार पर इलाहाबाद हाई कोर्ट में टैक्स लगाए
जाने को चुनौती दी थी कि कार्यक्रम एक कॉम्पिटीशन था और इसमें
किसी प्रकार का
मनोरंजन शामिल नहीं था।