इंडियन न्यूज सर्विस

Indian News Service

   राष्ट्रीय समाचार एजेंसी

00 समाचार एवं विचार का दैनिक पत्र 00

 मुख्य पृष्ठ

  आंचलिक

  राष्ट्रीय

  अंतरराष्ट्रीय

  राजनीति

  क्रीडा

  समाज

  साहित्य

  प्रौद्योगिकी

  व्यक्तित्व

 लोक-अभिरुचि

  पर्यटन

  फीचर्स

  फोटोग्राफ

  वीडियो

 सदस्य कैसे बनें

 

 

 

 

मुख्यमंत्री द्वारा शिक्षा कर्मियों को महंगाई भत्ते में वृध्दि के साथ संविलियन की सौगात

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने राज्य के शिक्षा कर्मियों के महंगाई भत्ते में आगामी एक अप्रैल से पांच प्रतिशत वृध्दि करने की घोषणा करते हुए कहा है कि शिक्षा कर्मियों का महंगाई भत्ता नये वित्तीय वर्ष में ग्यारह प्रतिशत से बढ़कर सोलह प्रतिशत हो जाएगा। स्कूल शिक्षा और आदिम जाति विकास विभाग में शिक्षकों के डाईंग पदों को पुनर्जीवित कर उनमें शिक्षा कर्मियों का संविलियन किया जाएगा। इसके लिए दोनों विभागों में प्रथम चरण में इस प्रकार के बीस-बीस प्रतिशत पदों पर संविलियन की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी।

 मुख्यमंत्री आज अपरान्ह यहां नेताजी सुभाष स्टेडियम में छत्तीसगढ़ शिक्षा कर्मी संघ के एक दिवसीय प्रांतीय महासम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। डॉ. सिंह ने शिक्षा कर्मियों को राजभाषा छत्तीसगढ़ी में संबोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने पिछले चार वर्ष में लगभग साठ हजार युवाओं को शिक्षा कर्मी के रूप में नियुक्त कर उन्हें रोजगार दिया है। निकट भविष्य में तीस हजार नये शिक्षा कर्मियों की भर्ती की जाएगी। स्कूल शिक्षा और पंचायत मंत्री श्री अजय चन्द्राकर, राजस्व, पर्यटन और संस्कृति मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल और राज्य वित्त आयोग के पूर्व अध्यक्ष श्री वीरेन्द्र पाण्डेय ने भी शिक्षा कर्मियों को संबोधित किया। स्कूल शिक्षा विभाग के संसदीय सचिव डॉ. त्रिविक्रम भोई, नगर निगम रायपुर के महापौर श्री सुनील सोनी और रायपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री श्याम बैस भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

 मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने महासम्मेलन में आगे कहा कि शिक्षा कर्मियों की समस्याओं के बेहतर समाधान के लिए राज्य सरकार द्वारा एक स्पष्ट और सकारात्मक सोच के साथ अपनी वित्तीय सीमाओं के भीतर हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि वे पूर्ण स्वाभिमान के साथ समाज, राज्य और देश के विकास के लिए तथा नयी पीढ़ी के निर्माण के लिए अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी निभा सकें। इसके लिए राज्य शासन द्वारा पिछले चार वर्ष में अनेक सकारात्मक कदम उठाए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा कर्मियों की समस्याओं के स्थायी रूप से समाधान के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक स्पष्ट नीति बनाने की जरूरत है इसके लिए केन्द्र सरकार से चर्चा की जाएगी। उन्होंने कहा कि सर्वशिक्षा अभियान के तहत यह योजना पूरे देश में चल रही है। विभिन्न राज्यों में उनकी सेवा शर्तों में समानता और सामंजस्य होना जरूरी है। डॉ. सिंह ने कहा कि सर्वशिक्षा अभियान में केन्द्र सरकार द्वारा पहले 75 प्रतिशत राशि राज्यों को दी जाती थी और राज्य सरकारें उसमें 25 प्रतिशत अंशदान करती थी, जबकि केन्द्र ने अब इसमें अपने हिस्से की राशि में 25 प्रतिशत कटौती करते हुए राज्यांश की राशि 50 प्रतिशत निर्धारित कर दी है। इससे छत्तीसगढ़ जैसे नये राज्यों के लिए वित्तीय कठिनाई होना स्वाभाविक है। इसे लेकर अभी केन्द्र और राज्यों के बीच मत-मतांतर है और विचार-विमर्श भी चल रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार के आग्रह पर केन्द्र सरकार ने एक वर्ष के लिए अपना अंशदान पैंसठ प्रतिशत और राज्य का अंशदान पैंतीस प्रतिशत करने की सहमति दी है, जबकि राज्यों को पहले 25 प्रतिशत अंशदान करना होता था। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके बावजूद छत्तीसगढ़ में प्रदेश सरकार ने शिक्षा कर्मियों की सेवा शर्तों से जुड़ी विसंगतियों को दूर करने के लिए अपने स्तर पर स्पष्ट सोच के साथ योजनाबध्द प्रयास किए हैं। मुख्यमंत्री ने शिक्षा कर्मी संघ के आग्रह पर कहा कि उन्हें पिछले वर्ष 13 नवम्बर से 18 दिसम्बर के बीच हड़ताल अवधि का वेतन दिलाने के विषय में भी अंतिम फैसला हो चुका है। इस समस्या का त्वरित निराकरण होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस दौरान महासमुंद जिले में बर्खास्त किए गए तेरह शिक्षा कर्मियों की बहाली के लिए आदेश भी कल जारी कर दिए जाएंगे।

 महासम्मेलन को संबोधित करते हुए स्कूल शिक्षा और पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री अजय चन्द्राकर ने कहा कि शिक्षा कर्मियों के व्यापक हित में राज्य में पिछले चार वर्ष में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय हुए जिनका क्रियान्वयन भी हो रहा है। इसके पहले के वर्षों में इतने अधिक सकारात्मक फैसले नहीं हुए थे। श्री चन्द्राकर ने कहा कि डॉ रमन सिंह के नेतृत्व में राज्य सरकार ने नवनियुक्त शिक्षा कर्मियों की परीविक्षा अवधि को तीन वर्ष से घटाकर दो वर्ष कर दिया। उनके लिए मानवीय संवेदना की दृष्टि से एक स्पष्ट तबादला नीति लागू की गयी। इसके अन्तर्गत परीविक्षा के प्रकरणों को छोड़कर तबादले के सभी आवेदन पत्रों का निराकरण करते हुए आवेदक शिक्षा कर्मियों को उसका लाभ दिया गया। श्री अजय चन्द्राकर ने यह भी कहा कि एक कल्याणकारी राज्य की अवधारणा के अनुरूप शिक्षा कर्मियों की समस्याओं के स्थायी समाधान के हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने शिक्षा कर्मियों से कहा कि नये छत्तीसगढ़ राज्य की नयी पीढ़ी के निर्माण की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी उन पर है। इस लिए उनको यह भी ध्यान में रखना होगा की राज्य के बच्चों के भविष्य से कोई खिलवाड़ न होने पाए। उन्होंने शिक्षा कर्मियों को यह भी बताया कि उनके पदों के लिए विभागीय सेट-अप अगले एकाध महीने में तैयार हो जाएगा, जिसमें डाईंग कैडर के बहुत से पदाेंं को पुनर्जीवित किया जाएगा। श्री चन्द्राकर ने कहा कि जब प्रदेश सरकार शिक्षा कर्मियों की समस्याओं को संवेदनशीलता के साथ चरणबध्द तरीके से हल कर रही है, तब शिक्षा कर्मियों को भी वायदा करना होगा कि वे जहां भी पदस्थ अथवा नियुक्त होंगे, वहां मन लगाकर पूरी गंभीरता से अपनी कर्तव्यों का पालन करेंगे। शिक्षा कर्मियों को स्कूलों में बच्चों की शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करने और अध्यापन कार्य के साथ-साथ बच्चों को मध्यान्ह भोजन योजना का लाभ दिलाने के लिए भी गंभीरता से काम करना होगा। राजस्व मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल ने भी राजभाषा छत्तीसगढ़ी में दिए गए अपने उद्बोधन में कहा कि डॉ. रमन सिंह की सरकार शिक्षा कर्मियों सहित समाज के सभी वर्गों की बेहतरी के लिए काम कर रही है। समाज के सबसे अंतिम व्यक्ति का सबसे पहले उत्थान राज्य सरकार का लक्ष्य है। मुख्यमंत्री ने गरीबी रेखा श्रेणी के सभी 34 लाख परिवारों को आगामी जनवरी माह से सिर्फ तीन रूपए प्रति किलो की दर से हर महीने 35 किलो चावल देने की घोषणा की है। यह लगभग 837 करोड़ रूपए की योजना होगी। छत्तीसगढ़ी को राजभाषा का दर्जा देने का विधेयक विधानसभा में पारित किया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने दस वर्ष या उससे ज्यादा समय से लगातार कार्यरत दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को नियमित करने का भी सैध्दांतिक निर्णय ले लिया है। श्री अग्रवाल के आव्हान पर शिक्षा कर्मियों ने इन सभी महत्वपूर्ण फैसलों के लिए करतल ध्वनि से मुख्यमंत्री का अभिनंदन किया।

 राज्य वित्त आयोग के पूर्व अध्यक्ष श्री वीरेन्द पाण्डेय ने अपने उद्बोधन में कहा कि रमन सरकार ने लगभग साठ हजार नौजवानों को शिक्षाकर्मी बनाकर रोजगार से लगाया है। श्री पाण्डेय ने कहा कि शिक्षकीय कार्य एक सम्मानजनक कार्य है, लेकिन जिस प्रकार बेहतर इलाज करने वाले डॉक्टरों को समाज सम्मान की दृष्टि से देखता है, ठीक उसी तरह बेहतर शिक्षकीय कार्य करने वालों को भी सामाजिक आदर और सम्मान मिलता है। श्री पाण्डेय ने कहा कि शिक्षा कर्मियों की सभी मांगों से मैं भी सहमत हूं, लेकिन हम सबको शासन की सीमाओं का भी ध्यान रखना होगा। मुख्यमंत्री चाहते हैं कि पूरा छत्तीसगढ़ विकसित और समृध्द हो। सबकी समस्याओं का समाधान हो। शासन द्वारा अपनी आर्थिक सीमाओं के भीतर इसके लिए हरसंभव कोशिश की जा रही है। प्रारंभ में छत्तीसगढ़ शिक्षा कर्मी संघ के प्रांताध्यक्ष श्री संजय शर्मा ने मांग पत्र और प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।

 

कार्यालय

संपादक, इंडियन न्यूज़ सर्विस, बाम्बे मार्केट, रायपुर, छत्तीसगढ़, मोबाईल- 09329024410, फोन- 0771-4269875, ई-मेल- editorins@gmail.com

 

 

सर्वाधिकार सुरक्षित © www.indiannewsservice.com

वेब-डिजाइन - कामिनी इन्फार्मेटिक्स के लिए प्रशांत रथ