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सरकारी धमकी नहीं रोक पाई मेडिकल छात्रों को
चेन्नै:
तमिलनाडु सरकार
के हॉस्टल खाली करवाने की धमकी को दरकिनार करते हुए राज्य के
मेडिकल छात्रों ने
रविवार को एक दिन के उपवास के रूम में अपनी हड़ताल शुरू की। इन
भावी डॉक्टरों ने
प्रशासन की इस चेतावनी के सामने न झुकने और आंदोलन को तेज करने
का इरादा भी
दोहराया।
ये मेडिकल छात्र हाल में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री अंबुमणि
रामदास के उस फैसले से भड़के हैं,
जिसमें एमबीबीएस कोर्स की अवधि बढ़ाने और गांवों
में अक एक साल के लिए अनिवार्य रूप से काम करने का प्रावधान
है। जब इस फैसले के
विरोध में मेडिकल छात्रों ने हड़ताल पर जाने की घोषणा की तो
राज्य सरकार ने कॉलेज
और हॉस्टल खाली करवाने की वॉर्निन्ग दी थी।
स्थानीय मेडिकल कॉलेज के एक
छात्र ने कहा कि हम अपने दोस्तों के घर में रुक जाएंगे,
लेकिन सरकारी धमकी में नहीं
आएंगे। इसके साथ ही इन छात्रों के माता-पिता भी अपने बच्चों के
कंसर्न से सहमत दिख
रहे हैं। हाल में प्रस्तावित बदलावों पर सभी की राय लेने के
लिए बनी संबाशिवा राव
कमिटी के सामने भी अभिभावकों ने यही बात दोहराई कि इससे उन पर
आर्थिक बोझ बढ़ेगा।
रामदास ने की डॉक्टरों से हड़ताल खत्म
करने की अपील
केंद्रीय हेल्थ मिनिस्टर डॉ.रामदास ने तमिलनाडु के
आंदोलनरत मेडिकल छात्रों से हड़ताल वापस लेने की अपील करते हुए
कहा है कि सरकार ने
अभी डॉक्टरी पढ़ रहे छात्रों के लिए एक साल अनिवार्य तौर पर
गांवों में सर्विस करने
से जुड़ा फैसला नहीं लिया है। मंत्री ने कहा कि संबाशिव राव
कमिटी इस मुद्दे पर काम
कर रही है और जब तक इसकी रिपोर्ट नहीं आ जाती सरकार कोई फैसला
नहीं लेगी। रामदास के
अनुसार कमिटी दिसंबर के आखिरी तक अपनी रिपोर्ट सबमिट कर देगी।

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