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नि:शक्तजन भगवान की अद्भुत रचनाएं - श्री नरसिंहन
विश्व विकलांग दिवस के अवसर पर आज प्रदेश के राज्यपाल श्री
ई.एस.एल. नरसिम्हन ने कहा कि नि:षक्तजनों के संबंध में समाज को
अपने दृष्टिकोण और नजरिये में परिवर्तन लाने की जरूरत है और इस
बात पर विचार करने की जरूरत है कि आखिर कौन निषक्त है?
क्योंकि वे जिन्हें हम विकलांग समझते हैं वे
हर समस्या का सामना आत्मविष्वास और ताकत के साथ करते हैं और
जीतते हैं। वास्तव में नि:शक्तजन भगवान की अद्भुत रचनाएं हैं
और 'शक्ति के चिन्ह'
हैं। इस अवसर पर राज्य की प्रथम महिला श्रीमती
विमला नरसिम्हन, महिला एवं बाल विकास
तथा समाज कल्याण मंत्री सुश्री लता उसेण्डी,
संसदीय सचिव, महिला
एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण विभाग श्रीमती रमशीला साहू,
महापौर श्री सुनील सोनी,
छत्तीसगढ़ नि:शक्तजन वित्त एवं विकास निगम
श्रीमती सरला जैन विशेष रूप से उपस्थित थे।
उन्होंने यह विचार रायपुर के मेडीकल सभागृह में आयोजित
नि:शक्तजन राज्य स्तरीय पुरस्कार समारोह में व्यक्त किए। श्री
नरसिम्हन ने कहा कि वास्तव में नि:शक्तजनों से हमें प्रेरणा
मिलती है। उन्होंने मूक बघिर एवं दृष्टिबाधित हेलन किलर और
अपने निजी परिवार की एक अंधत्व से पीडित बालिका का उदाहरण देकर
बताया कि किस तरह उन्होंने अपने कमियों पर विजय पाई है।
उन्होंने कहा कि हम नि:शक्तजनों को कई कामों से जोड़ सकते हैं।
उन्होंने शासन से यह आग्रह करते हुए कहा कि वे यह देखें कि
च्वाईस सेंटर की जो पहल है,
उसमें इनकी क्षमताओं का उपयोग किस तरह से किया
जा सकता है।
महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री सुश्री लता
उसेण्डी ने कहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम
व्यक्तियों तक पहुंचना चाहिए। आगे भी इस इच्छाशक्ति को बनाए
रखना होगा उन्होंने जानकारी देते हुए कहा कि
300 नि:शक्त व्यक्तियों को स्वरोजगार के लिए
ऋण प्रदान किया गया है और 16 जिलों में
पुनर्वास केन्द्रों की भी स्थापना की गई है। विवाह योग्य
नि:शक्तजनों को उनके विवाह के लिए 21
हजार रूपए की राशि भी शासन द्वारा प्रदान की जा रही है और साथ
ही सरकारी नौकरी में भी उन्हें आरक्षण प्रदान किया जा रहा है।
इस अवसर पर नि:षक्तजनों के कल्याण में प्रभावी भूमिका निभाने
वाले सर्वोत्तम स्वैच्छिक संस्थाओं,
सर्वोत्तम कर्मचारी,
सर्वोत्तम नियोक्ता एवं सर्वोत्तम जिले को राज्यपाल के करकमलों
से पुरस्कृत किया गया। दृष्टिहीन नि:शक्त कर्मचारी,
श्री भोला सिंह, ग्राम
नागपुर, मनेन्द्रगढ़,
जिला कोरिया, श्रवण
नि:शक्त कर्मचारी, श्री पवन अग्रवाल
आकाशस्टील इन्डस्ट्रीज, अम्बिकापुर,
सरगुजा, अस्थि नि:शक्त
कर्मचारी कु. शबनम खातून अम्बिकापुर,
जिला सरगुजा, श्री नंदकिशोर गर्ग बतौली,
जिला सरगुजा,
सर्वोत्तम नियोक्ता, नि:शक्तजनों के
सर्वोत्तम नियोक्ता, जनपद पंचायत,
गुण्डरदेही, जिला
दुर्ग, सर्वोत्तम स्वैच्छिक संस्था,
दृष्टि बाधित क्षेत्र में कार्य कर रही संस्था
मानव जीवन ज्योति नेत्रहीन, विद्यालय
कुनकुरी, सरगुजा,
श्रवण बाधित क्षेत्र में कार्य कर रही संस्था,
प्रयास श्रवण विकलांग संस्था,
सुपेला, भिलाई जिला
दुर्ग, अस्थि बाधित क्षेत्र में कार्य
कर रही संस्था होलीक्रास विकलांग सेवा,
पत्थलगांव, जशपुर ,
प्रमस्तिक अंगद्यात#
बहुविकलांग के क्षेत्र में कार्य कर ही संस्था,
बस्तर विकलांग सेवा समिति जिला-जगदलपुर,
सर्वोत्तम जिला सर्वोत्तम जिला जिला कबीरधाम
को पुरस्कृत किया गया।
सांस्कृतिक कार्यक्रम में विजयी प्रतिभागियों श्री सुलभ राजपूत,
श्री मनहरण एवं साथी,
समूह गायन, शास. दृष्टि एवं श्रवण
बाधितार्थ विद्यालय, मठपुरैना,
रायपुर, श्री मनोज
पाण्डे, एकल अभिनय,
श्री गांधी भारती एवं साथी,
नाटक, ज्ञान गंगा
स्कूल, सरगुजा,
श्री लक्ष्मण, एकल गायन,
ज्ञानोदय एसोसिएशन,
सरगुजा, श्री पंचराम व साथी,
समूह नृत्य, अस्थि
बाधित बाल गृह, माना केम्प,
रायपुर, श्री भारत,
मिमिक्री, शास.
बहुविकलांग गृह, माना केम्प,
रायपुर, कु. खुशबू एवं
साथी समूह नृत्य#प्रहसन,
जिला नि:शक्त पुनर्वास केन्द्र,
महासमुंद, श्री अमोल
रोशन, एकज नृत्य,
होलीक्रास आशा निकुंज विकलांग विद्यालय,
अम्बिकापुर, सरगुजा,
श्री धनेश रामायण व साथी,
समूह नृत्य, मानसिक
रूप से अविकसित बच्चों का गृह, माना
केम्प, रायपुर के बच्चों को भी
पुरस्कृत किया गया ।
प्रसिध्द बाल हास्य कलाकार मास्टर जय छनियारा ने अपने चुटकुलों
से सबका मनोरंजन किया। उहीं लाफ्टर चैलेंज के प्रसिध्द हास्य
कलाकार राजा-रैन्चों ने भी सबको खुब हसाया। इस अवसर पर महिला
एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण विभाग के सचिव श्री जवाहर
श्रीवास्तव,
संचालक श्री पी.पी. सोती सहित विभाग के
अधिकारी एवं नि:शक्तजन उपस्थित थे

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