नयी
दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया
गांधी ने आज सोहराबुद्दीन फर्जी मुठभेड़
को गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी
द्वारा जायज ठहराने और पश्चिम बंगाल के
नंदीग्राम में माकपा के सशस्त्र कैडरों
द्वारा की गयी हिंसा दोनों की परोक्ष
रूप से कड़ी आलोचना की।
सोनिया ने यहां
कांग्रेस संसदीय दल की बैठक के संबोधन
में सोहराबुद्दीन मुठभेड़ मामले पर मोदी की
हाल की टिप्पणी का सीधा उल्लेख किए बिना
कहा कि गुजरात में हम अपने प्रचार में
संविधान और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों के
प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करेंगे और
भाजपा सरकार की घोर असफलताओं को उजागर
करेंगे। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की
उपस्थिति में उन्होंने कहा कि मीडिया ने
भी 2002
में हुई नृशंसता में भाजपा नेता की
सक्रिय भागीदारी को बेनकाब कर दिया है।
उनका आशय गुजरात दंगों के बारे में तहलका के
हाल के स्टिंग आपरेशन की आ॓र था।
नंदीग्राम के संदर्भ में उन्होंने माकपा
का नाम
लिए बिना कहा कि हिंसा की प्रवृति और
जिस तरह से सशस्त्र पार्टी कैडरों ने कानून
व्यवस्था की मशीनरी को जनता के प्रति
उसके कर्तव्य का निर्वहन करने से रोका वह
दुर्भाज्ञपूर्ण है। उन्होंने कहा कि
इसका एक स्थायी समाधान खोजा जाना आवश्यक है
जिससे कि ऐसी घटनाएं दोबारा होने से
रोकी जा सकें। अपने बगल में बैठे प्रधानमंत्री
सिंह की सराहना करते हुए उन्होंने कहा
कि उन्होंने अपने विद्वतापूर्ण नेतृत्व को
अपनी दृढ़ इच्छा शक्ति से साबित कर दिया
है। सोनिया गांधी ने संसद में भाजपा के कथित
विघ्नकारी आचरण की भी कड़ी आलोचना की।
उन्होंने कहा कि हाल ही में संसद में परमाणु
समझौते पर हुई चर्चा के दौरान मुख्य
विपक्षी दल का खोखलापन बेनकाब हो चुका है।
सोनिया ने नंदीग्राम मुद्दे पर उस समय
हल्ला बोला है जब पश्चिम बंगाल के
मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य इसे
राजनीतिक और प्रशासनिक असफलता के रूप में
स्वीकार कर चुके हैं और तृणमूल कांग्रेस
की नेता ममता बनर्जी उनकी स्वीकारोक्ति का
भरपूर राजनीतिक फायदा उठाने में जुटी
हैं।
गुजरात के संदर्भ में उन्होंने कहा
कि भाजपा ने पिछले दशक या उससे भी पहले
से जो वादे किए थे वे सब खोखले साबित हुए
हैं। उन्होंने कहा कि विकास के कुछ दावे
या तो बहुत अधिक बढ़ा चढ़ाकर किए गए हैं और
कुछ मामलों में तो वे कोरी झूठ साबित
हुए हैं।
उन्होंने कहा कि उनकी यह धारणा है
कि गुजरात के लोग परिवर्तन चाहते हैं।
हिमाचल प्रदेश के संदर्भ में उन्होंने कहा कि
पार्टी वहां एकजुट होकर काम कर रही है।
वह दोबारा जनादेश पाने में सफल होगी।
उन्होंने कहा कि हमारी राज्य सरकार ने
पिछले पांच वर्षो में जनता के कल्याण और
राज्य के विकास के लिए काम किया है।
सोनिया गांधी ने कहा कि कुछ ही सप्ताह
में
पार्टी को मेघालय त्रिपुरा और नगालैंड
विधानसभा चुनावों की तैयारी में भी जुट जाना
होगा। उन्होने कहा कि पूर्व में इन
राज्यों में पार्टी बहुत मजबूत रही है और हमें
फिर से वह स्थिति हासिल करनी है।
पार्टी के चुनावी मुद्रा अख्तियार करने
का
संकेत देते हुए सोनिया गांधी ने उम्मीद
जतायी कि पार्टी के सांसद अब से अपना अधिक
से अधिक समय अपने निर्वाचन क्षेत्रों और
जनता के बीच बिताएंगे। उन्होंने अपने
सांसदों से यह भी उम्मीद की कि वह जनता
के बीच जाकर उन्हें पार्टी के कार्यक्रमों
की जानकारी देंगे और पार्टी के प्रति
जनता की आकांक्षाओं को जानने का प्रयास
करेंगे। उन्होंने प्रधानमंत्री की
सराहना करते हुए कहा कि हमारे खाते में बहुत सारी
उपलब्धियां हैं।
असम में हाल ही में हुई हिंसा का उल्लेख
करते हुए उन्होंने कहा
कि इसकी कड़ी से कड़ी आलोचना की जानी
चाहिए। उन्होने कहा कि वहां कांग्रेस सरकार ने
घटना की सीबीआई से जांच कराने का आदेश
देने में कोई कोताही नहीं बरती। साथ ही
उन्होंने असम में आदिवासी युवती के आत्म
सम्मान को ठेस पहुंचाए जाने के वाक्ये पर
भी गहरा दुख और खेद प्रकट किया।
उत्तर प्रदेश के तीन शहरों में हाल में
हुए
सिलसिलेवार बम विस्फोटों के संबंध में
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि प्रदेश को बड़े से
बड़े उकसावे में भी सामाजिक शांति और
सौहार्द बनाए रखना है। उन्होंने कहा कि
संवेदनशील सार्वजनिक क्षेत्रों में कड़ी
निगरानी और पुख्ता खुफिया सूचनाएं संग्रहित
करने की जरूरत है। कांग्रेस अध्यक्ष ने
भाजपा को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि
2004
का
लोकसभा चुनाव हारने की कुंठा में वह
संसद की कार्यवाही में बार बार विघ्न डाल रही
है और इसके चलते वर्तमान सत्र में भी कई
दिन व्यर्थ गंवाने पड़े।