|
फर्जी मुठभेड़ मामले में
सुप्रीम कोर्ट में सरकार के वकील ने केस लड़ने से इंकार किया.
नई दिल्लीः
फर्जी मुठभेड़ मामले में
सुप्रीम कोर्ट में गुजरात सरकार की ओर से पैरवी करने वाले
वरिष्ठ वकील के. टी. एस.
तुलसी ने अब यह केस लड़ने से इनकार कर दिया है। गुजरात के
मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी
के सोहराबुद्दीन मामले में आए बयान के बाद तुलसी ने यह फैसला
लिया।
बुधवार को टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए तुलसी ने मोदी पर
हत्या को सही ठहराने जैसे बयान देकर कानून और सुप्रीम कोर्ट के
साथ खिलवाड़ करने का
आरोप लगाया।
वैसे मोदी के लिए चीफ इलेक्शन कमिशनर एन.
गोपालास्वामी के बयान से ज्यादा चिंता की बात और क्या हो सकती
है। गोपालास्वामी ने
कहा
, '
अगर इलेक्शन कमिशन को किसी तरह की शिकायत मिलती है
,
तो जिला चुनाव अधिकारी द्वारा मामले की जांच की जाएगी। वह
चुनाव आयोग को उचित
कार्रवाई करने के लिए एक रिपोर्ट देंगे।
'
दरअसल
,
बुधवार को कांग्रेस ने जिला इलेक्शन ऑफिस में एक शिकायत दाखिल
कर मोदी के
भाषण पर उनके खिलाफ कार्रवाई करने की मांग कर दी है। सूरत के
कांग्रेस प्रेजिडेंट
सुनील भूकनवाला ने बताया कि मामला सुप्रीम कोर्ट में है और
किसी को भी इस मामले का
राजनीतिक फायदा नहीं उठाना चाहिए।
सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता
सीतलवाड़ ने भी मामले में दखलअंदाजी करते हुए चुनाव आयोग को एक
खत लिखा है। तीस्ता
ने लिखा है कि गुजरात के मुख्यमंत्री चुनाव से पहले
सांप्रदायिक भावनाओं को भड़का
रहे हैं। तीस्ता के खत के मुताबिक
, '
मोदी का भाषण खुले तौर पर हिंसा
को भड़काने वाला था और एक ऐसे व्यक्ति के लिए पूरी तरह
गैरकानूनी था
,
जो दोबारा चुनाव में उतरा हो। क्या यह कानून और चुनाव आचार
संहिता का उल्लंघन
नहीं है
?'
मोदी की मुश्किलों में इजाफा करते हुए
सोहराबुद्दीन के भाई रुबाबुद्दीन सुप्रीम कोर्ट में इस बात की
गुहार लगाने की
तैयारी कर रहे हैं कि मोदी पर भी उसके भाई और भाभी की हत्या के
षडयंत्र में शामिल
होने का मुकदमा चलाया जाए। रुबाबुद्दीन की पहल पर ही सरकार को
सोहराबुद्दीन हत्या
मामले में डीजी वंजारा समेत कई सीनियर पुलिस अधिकारियों पर
कार्रवाई करनी पड़ी थी।
एडवोकेट तुलसी ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि सोहराबुद्दीन
की हत्या में शामिल किसी भी व्यक्ति को राज्य बख्शेगा नहीं
,
इसलिए
सीबीआई को इसकी जांच न सौंपी जाए। उन्होंने टाइम्स ऑफ इंडिया
से कहा कि मोदी के
रैली में भाषण के दौरान हत्या को सही ठहराने उन्हें बेहद दुख
हुआ है।बार
में देर

|
 |