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बिजली कम्पनियां
झटका
देने के मूड में
नई दिल्ली। राजधानी में बिजली की दरें बढ़ सकती हैं। बिजली
कंपनी बीएसईएस राजधानी पावर लिमिटेड ने पांच सालों के राजस्व
हानि को देखते हुए बिजली दरों में पांच फीसद तक वृद्धि की
सिफारिश की है। कम्पनी की सिफारिशें मान ली गईं तो
200
यूनिट तक प्रतिमाह खर्च करने वाले उपभोक्ताओं को छोड़कर बाकी
उपभोक्ताओं के लिए प्रति यूनिट में
59
पैसे की वृद्धि हो सकती है। कंपनी ने यह सिफारिश डीईआरसी को
दिए एन्यूअल रेवन्यू रिक्वायरमेंट (एआरआर) में की है।
चार साल के लिए बिजली की दरों को निर्धारित करने के लिए बिजली
कंपनियों ने डीईआरसी को अपना एआरआर भेजना शुरू कर दिया है।
सबसे पहले बीएसईएस राजधानी पावर लिमिटेड ने एआरआर भेजा है।
दिल्ली में बिजली की दरों में बीते साल से कोई वृद्धि इस कारण
नहीं हुई कि बिजली की दरों का आधा-आधा भार बिजली कंपनियां और
दिल्ली सरकार वहन कर रही है। बिजली कम्पनी का कहना है कि बिजली
की दरों में पांच सालों में
17
प्रतिशत वृद्धि हुई है जबकि निजीकरण की शर्तों के मुताबिक
प्रतिवर्ष साढ़़े सात प्रतिशत की दर से अब तक
38
प्रतिशत वृद्धि
होनी थी। डीईआरसी को भेजे गए एआरआर में बिजली कंपनी ने आगे आने
वाले चारों वित्त वर्षो का लेखा-जोखा दिया है। एआरआर में बताया
गया है कि
2008
में एआरआर
3868.67
करोड़ और राजस्व हानि
833.61
करोड़,
2009
में एआरआर
3879.84
करोड़ और राजस्व हानि
670.72
करोड़,
2010
में एआरआर
3874.73
करोड़ और राजस्व हानि
401.93
करोड़ और
2011
में एआरआर
4185.06
करोड़ और राजस्व हानि
410
करोड़ रूपए है। इसी प्रकार एआरआर में बिजली की खरीद में भी
बढ़ोतरी को दर्शाया गया है। मसलन
2007
में प्रति यूनिट खरीद मूल्य
2
रूपए
41
पैसे,
2008
में
2
रूपए
80
पैसे,
2009
में
2
रूपए
60
पैसे,
2010
में
2
रूपए
60
पैसे और
2011
में
2
रूपए
70
पैसे की दर को दर्शाया है। एआरआर में जेजे क्लस्टर व
200
यूनिट तक प्रतिमाह खर्च करने वाले उपभोक्ताओं को छोड़कर बाकी
उपभोक्ताओं के लिए प्रति यूनिट दर में
59
पैसे वृद्धि की सिफारिश की गई है। एआरआर में दिए आंकड़ों के
अनुसार वित्त वर्ष
2007-08
में महंगी कीमतों में बिजली खरीदने के चलते कंपनी पर भार
285.15
करोड़ रूपए पड़ेगा। वित्त वर्ष
2008-09
में यह भार
262
करोड़ तक होगा जो कि अगले वित्त वर्ष में खत्म होगा
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