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पूर्व सांसद आनंद मोहन सहित तीन को फांसी

 

जिलाधिकारी कृष्णैया हत्याकांड

 पटना के अतिरिक्त जिला और सत्र न्यायाधीश रामकृष्ण राय ने 13 वर्ष पूर्व गोपालगंज के तत्कालीन जिलाधिकारी जी. कृष्णैया की पीट-पीटकर हत्या किए जाने के मामले में पूर्व सांसद आनंद मोहन, पूर्व विधायक अखलाक अहमद और प्रोफेसर अरूण कुमार को आज फांसी की सजा सुनाई तथा एक वर्तमान विधायक सहित चार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
न्यायाधीश राय ने गत सोमवार को कृष्णैया हत्याकांड मामले में सात व्यक्तियों को दोषी करार दिया था जिनको आज सजा सुनाई गयी। आजीवन कारावास की सजा पाने वालों में आनंद मोहन की पत्नी लवली आनंद, वर्तमान जद यू विधायक विजय कुमार शुक्ला उर्फ मुन्ना शुक्ला तथा शशि शेखर और हरेन्द्र कुमार शामिल हैं।
कृष्णैया की पांच दिसंबर 1994 को बिहार पीपुल्स पार्टी के समर्थकों द्वारा उस समय मुजफ्फरपुर जिले में बुरी तरह से पिटाई करने के बाद गोली मारकर हत्या कर दी गयी थी जब वह किसी कार्य से अपने सरकारी वाहन से जा रहे थे। मुन्ना शुक्ला के बडे भाई छोटन शुक्ला की एक दिन पूर्व चार दिसंबर को हत्या की गयी थी और लोग छोटन के शव के साथ प्रदर्शन कर रहे थे। उसी समय दुर्भाज्ञ से सडक से कृष्णैया की कार गुजरी। लोगों ने उनकी कार पर लगी बीकन लाइट को देखने के बाद कार रोक लिया और यह आरोप लगाते हुए कि छोटन शुक्ला की हत्या प्रशासन के इशारे पर की गयी है, उनकी पिटाई शुरू कर दी और अधमरा करने के बाद गोली मार दी।
न्यायाधीश राय ने 36 आरोपियों में से 29 को संदेह का लाभ देते हुए गत सोमवार को दोषमुक्त कर दिया था और सात व्यक्तियों को दोषी करार दिया था। सभी सजायाफ्ता दोषियों को भारतीय दंड संहिता की धारा (302) हत्या (307) हत्या की कोशिश (147) दंगा और (427) पचास रूपये से अधिक क्षति करने का दुष्चक्र के तहत सजा दी गयी है। सजा पाये गये सभी दोषी न्यायालय में उपस्थित थे और सजा सुनने के बाद उन लोगों ने जेल में प्रशासन द्वारा की गयी व्यवस्था के खिलाफ शिकायत की।
आनंद मोहन ने कहा कि उन्हें अरूण कुमार और अखलाक अहमद को ऐसे वार्ड में बंद किया गया है जहां पंखा भी नहीं है जबकि उनकी पत्नी लवली आनंद को विक्षिप्त महिला कैदियों के साथ रखा गया है। मोहन ने न्यायाधीश से कहा कि जबतक वे लोग जिंदा है तबतक उन्हें मानवीय सुविधायें प्रदान की जायें। इसपर न्यायाधीश ने कहा कि वह पटना के जिलाधिकारी और जेल के अधीक्षक को आवश्यक निर्देश जारी करेंगे। न्यायाधीश राय ने कहा कि वह मौत की सजा की पुष्टि के लिए अपने आदेश की प्रतियां पटना उच्च न्यायालय भेजेंगे। बाद में आनंद मोहन ने संवाददाताओं से कहा कि वह पूरी तरह निर्दोष हैं। छोटन शुक्ला की शव यात्रा में 15 पुलिस निरीक्षक और दो अनुमंडल अधिकारी तैनात किए गये थे और जब इतने अधिकारी तत्कालीन जिलाधिकारी की जान नहीं बचा सके तो वह अकेले क्या कर सकते थे।
उन्होंने कहा कि मैं साजिश का शिकार हुआ हूं क्योंकि मै सरकार का विरोध कर रहा हूं। आनंद मोहन हालांकि अभी भी तकनीकी रूप से जनता दल यू में हैं लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ उनके अच्छे ताल्लुक नहीं है। मुन्ना शुक्ला ने कहा कि वह अपने भाई के शव के साथ शव यात्रा में एकदम आगे थे जबकि जिलाधिकारी की हत्या सबसे पीछे भीड द्वारा की गयी थी। उन्होंने कहा कि मैं नहीं जानता कि किन लोगों ने कृष्णैया की हत्या की।
कृष्णैया की मुजफ्फरपुर जिले के बाहरी छोर पर खबरा के पास पहले पिटाई की गयी और बाद में गोली मार दी गयी थी। इस घटना के ठीक एक दिन पूर्व चार दिसंबर को मुन्ना शुक्ला के भाई छोटन शुक्ला की हत्या कर दी गयी थी। शुक्ला की हत्या में कथित रूप से पूर्व मंत्री बृजबिहारी प्रसाद और उनके गुंडों का हाथ था जबकि प्रसाद की भी वर्ष 1998 के 13 जून को पटना के इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान में हत्या कर दी गयी थी। प्रसाद उस समय तकनीकी संस्थान में प्रवेश में हुए घोटाले के आरोप में गिरफ्तार किए जा चुके थे। छोटन शुक्ला की हत्या कथित रूप से शुक्ला और प्रसाद के समर्थकों के बीच गैंगवार का परिणाम था जबकि प्रसाद की हत्या के बाद गोविंदगंज से निर्दलीय विधायक देवेन्द्रनाथ दूबे की भी हत्या की गयी थी। प्रसाद की हत्या में वर्तमान लोजपा सांसद सूरजभान सिंह, मुन्ना शुक्ला और पूर्व विधायक राजन तिवारी आरोपी हैं और उनपर मुकदमा चल रहा है

 

 

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