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कुशल नेतृत्व ने आंदोलन को हिंसक होने से बचाया था

नितिन झा

पं. विघाचरण शुक्ल छत्तीसगढ़ के एकमात्र अन्तर्राष्टीय प्राप्त नेता हैं जिन्होंने प्रधामंत्री पद के अलावा समस्त केन्दीय मंत्री पद सुशोभित किय़ा है।आपने नौ बार लोकसभा चुनाव जीतकर इतिहास रचा है। आपने 1957 में लोकसभा चुनाव जीतकर सफल राजनैतिक जीवन की शुरूवात की थी।तत्पश्चात 1962 में,महासमुंद ,1967में महासमुंद (उपचुनाव) ,1971 में रायपुर ,1980 में महासमुंद ,1989में महासमुंद (जनता दल से ) ,1991में रायपुर क्षेत्र से चुनाव जीता।

छत्तीसगढ़ राज्य संघर्ष मोर्चा के संयोजक विघाचरण शुक्ल के नेतृत्व में सैकडों पदाधिकारी एनम् कार्यकर्ता जन-जन को इस आदोंलन से जोड़कर भाजपा के जनाधार को हिला दिंये थे,अतः भारतीय जनता पार्टी ने मजबूरी मे उक्त विधेयक पेश किया।

राज्य संघर्ष मोर्चा के नेताओं एवंम् कार्यकर्ता से केन्द में बैठी राष्टीय जनतांत्रिक गठबंधन  सरकार कितनी भयभीत थी वह इसी बात से पता चलता है, कि छत्तीसगढ़  के  आंदोलन कारियों सें अश्रुगैस ,लाठीचार्च  एवंम्  पानी की धार जैसे क्रुर तरीके  से आंदोलन को दबाने की कोंशिश की। दिल्ली पुलिस दी इस दमनात्मक कार्यवाही से आंदोलनकारी  भड़क उठे थें,परंतु  विघाचरण शुक्ल के  कुशल नेतृत्व के कारण किसी तरह की अनहोनी नहीं हुई। छत्तीसगढ़ राज्य संघ मोर्चा द्वारा विगत् डेढ़ वर्ष से सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ में एवंम 2 जुलाई 2000 को  जेल भरों आदोंलन  किया गया था । इस आदोंलन में हजारों की संख्या में छत्तीसगढ़  के लोंगो ने बढ़-चढ़कर  हिस्सा लिया था। त्तपश्चात संघर्ष मोर्चा द्वारा  20 जुलाई को सम्पूर्ण छत्तीसगढ़  बंद का आह्रान किया गया । यह बंद  रहा जो  जनता की मानसिकता को प्रदर्शित करता है।

विघाचरण शुक्ल के नेतृत्व में 25 जुलाई को संसद का घेराव करने  छत्तीसगढ़ के विभिन्न शहरों का घेराव करने छत्तीसगढ़ के विभिन्न  शहरों , कस्बों से लगभग ,सात हजार नागरिक दिल्ली कूच किये,वही दिल्ली में बसे लगभग सात हजार नागरिक दिल्ली में बसें लगभग 5000 नागरिकों नें संसद घेराव में साथ दिया। जतंर- मतंर में विघाचरण शुक्ल दोपहर 12-30 बजे पहुँचे  वहां हारों कार्यकता जय छत्तीसगढ़ के गगनभेदी नारो से प्रर्दशन कर रहे थे। इसी दौरान अखिल भारतीय युवा कांग्रेस का प्रर्दशन भी चल रहा था। हजारों कार्यकर्ता युवक कांग्रेस के प्रर्दशनकारियों के साथ-साथ चलने लग गयें ,अतः विघाचरण शुक्ल के नेतृत्व में जय छत्तीसगढ़ ,जय-जय छत्तीसगढ़ के गगनभेदी नारों के साथ संसद का घेराव करनें जबर्दश्त जोश के साथ निकल पड़े।छत्तीसगढ़ के विधायकों ,मंत्रियों की  उपस्थित कार्यकर्ताओंका मनोंबल बढ़ाने में सहायक रही ।दिल्ली पुलिस द्वारा चार बेरीकेट्स पहले ही तोंजा जा टुका था। दूसरा बेरीकेट्स से पूर्व विघाचरण शुक्ल अपने खास समर्थको के खास के साथ  मेटाडोंर में  बने अस्थायी मंच से आंदोलनकारियों को  संबोधित कप रहें थे। इसी बीच आंदोलनकारियों  की अत्यधिक भीड़  देखकर एवंम गगन भेदी नारों को सुनकर दिल्ली पुलिस घबरा गई। लोकत्तांत्रिक ढंग से प्रदर्शन कर रहे , हजारों छत्तीसगढ़वासियों पर अश्रुगैस के गोले दागें गए। अश्रुगैस के धुए से आंदोलनकारियों की आंखो से आंसू निकल रहा था तथा चेहरे में भयंकर जलन एवंम  श्वास लेने में  तकलीफ हों रही थी। जिससे आंदोलनकारियों में भगदड़ मच गई थी। तत्पश्चात पं. विघाचरण शुक्ल ने दिल्ली पुलिस को चेताया कि वे अश्रुगैस का उपयोग बंद कर दें अन्यथा  छत्तीसगढ़ के आंदोलनकारियों के आक्रोंश का सामाना उन्हें करना पड़ेगा। शुक्ल जी की इस धसकी के पश्चात दिल्ली पुलिस न् अश्रु गैस चलाना बंद कर दिया , परंतु दिल्ली पुलिस द्वारा जतंर-मतंर क्षेत्र में धारा 144 लगा दी गई। इस दौरान हजारों कार्यकर्ता दूसरे बेरीकेट्स तक पहुँच गए थे, जहाँ ड्यूटी पर हारों पुलिस कर्मियों एवं आंदोलनकारियों में झूमाझटकी मची थी। जीत आंदोलनकारियों की हुई थी, दूसरा  बेरीकेट्स में पहुँचते ही कार्यकर्तायों में जोश और बढ़ गया था, वहीं पुलिस की दमनात्मक कार्यवाही भी तेज हो गई थी, कार्यकर्ता कों लाठियों से पीटा  जा रहा था, एवम् उन पर पानी की तेज धार मारी जा रही थी परंतु कार्यकर्तायों के जोश के कारण पुलिस को पीछे जाना पड़ा। त्तपश्चात लगभग 12000 आंदोलनकारियों ने विघाचरण शुक्ल के नेतृत्व में धारी 144 के कारण करने के कारण अपनी गिरफ्तारी दर्ज करायी।

 

 

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