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क्रिकेट
से प्यार
और
हॉकी से
सौतेले
व्यवहार
दिल्ली
(आईएनएस)
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27
सितम्बर
2007
। ट्वेंटी
- 20 वर्ल्ड
कप
जीतने
वाली
भारतीय
क्रिकेट
टीम
का
बुधवार
को
स्वदेश
लौटने
पर
मुंबई
में
वैसा
ही
भव्य
स्वागत
हुआ
, जैसा
एक
विजेता
टीम
का
होना
चाहिए।
धोनी
की
टीम
पर
इनामों
की
बौछार
तो
तभी
शुरू
हो
गई
थी
, जब
उसने
पाकिस्तान
को
हराकर
कप
जीता
था।
भारतीय
क्रिकेट
बोर्ड
(बीसीसीआई
) के
अलावा
केंद्र
और
राज्य
सरकारें
भी
इस
मामले
में
पीछे
नहीं
रहीं।
लेकिन
यह
बात
हमारे
हॉकी
खिलाड़ियों
को
बुरी
तरह
चुभ
गई
कि
उन्होंने
इस '
सौतेले
व्यवहार '
के
खिलाफ
भूख
हड़ताल
तक
की
धमकी
दे
डाली।
इस
धमकी
के
बाद
कर्नाटक
सरकार
और
नागरिक
उड्डयन
मंत्री
प्रफुल्ल
पटेल
ने
एशिया
कप
जीतने
वाली
हॉकी
टीम
के
खिलाड़ियों
को
भी
इनाम
देने
का
ऐलान
कर
दिया
, लेकिन
इससे
यह
तो
साबित
हो
ही
गया
कि
हॉकी
खिलाड़ियों
की
शिकायत
जायज
है।
बीसीसीआई
ने
वर्ल्ड
कप
जीतने
वाली
टीम
के
हर
खिलाड़ी
को
80-80 लाख
रुपये
का
इनाम
दिया।
लेकिन
हॉकी
खिलाड़ियों
का
गुस्सा
इस
बात
से
भड़का
कि
क्रिकेट
टीम
में
शामिल
हर
खिलाड़ी
को
उसके
राज्य
की
सरकार
ने
भी
इनाम
देने
की
घोषणा
कर
दी।
नैशनल
हॉकी
कोच
जोकिम
कारवाल्हो
ने
हॉकी
खिलाड़ियों
के
रोष
को
जाहिर
करते
हुए
कहा
कि
उनकी
टीम
ने
भी
एशिया
कप
जैसा
बड़ा
टूर्नामेंट
जीता
था
, लेकिन
उनके
खिलाड़ियों
को
किसी
ने
पूछा
तक
नहीं।
उनकी
शिकायत
है
कि
हॉकी
खिलाड़ियों
को
लावारिसों
की
तरह
नजरअंदाज
कर
दिया
जाता
है
और
नेताओं
में
हॉकी
के
खिलाफ
पूर्वाग्रह
है।
उन्होंने
सवाल
उठाया
कि
एशिया
कप
जीतने
वाली
टीम
में
कर्नाटक
और
झारखंड
के
कई
खिलाड़ी
थे।
लेकिन
वहां
की
सरकारों
ने
उन्हें
एक
पैसा
भी
नहीं
दिया
, जबकि
क्रिकेट
खिलाड़ियों
को
बडे़
- बड़े
इनाम
देने
की
घोषणा
की
गई।
कारवाल्हो
केंद्र
सरकार
से
भी
कम
नाराज
नहीं
थे।
केंद्रीय
उड्डयन
मंत्री
ने
एयर
इंडिया
में
काम
करने
वाले
वर्ल्ड
कप
टीम
के
खिलाड़ियों
को
नकद
इनाम
के
अलावा
आउट
ऑफ
प्रमोशन
देने
का
ऐलान
किया
है
, जबकि
एयर
इंडिया
और
इंडियन
एयरलाइंस
में
काम
करने
वाले
हॉकी
टीम
के
खिलाड़ियों
को
एशिया
कप
जीतने
के
बाद
कुछ
भी
नहीं
मिला
था।
हॉकी
खिलाड़ी
गगन
अजित
सिंह
को
भी
यह
मलाल
है
कि
हॉकी
खिलाड़ियों
को
क्रिकेट
खिलाड़ियों
की
तुलना
में
कुछ
नहीं
मिलता।
कारवाल्हो
ने
साफ
कहा
कि
उन्हें
इस
बात
से
कोई
शिकायत
नहीं
है
कि
क्रिकेटरों
को
इतना
पैसा
क्यों
मिल
रहा
है।
उन्हें
तो
इस
बात
का
अफसोस
है
कि
हॉकी
खिलाड़ियों
को
वह
क्यों
नहीं
मिल
रहा
, जिसके
वे
हकदार
हैं।
यह
सच
है
कि
भारतीय
क्रिकेट
बोर्ड
इतना
अमीर
है
कि
हॉकी
संघ
खिलाड़ियों
के
पैसे
देने
के
मामले
में
उसकी
बराबरी
कतई
नहीं
कर
सकता।
इसके
अलावा
स्पॉन्सर
करने
वाले
भी
मार्केट
की
डिमांड
होने
के
कारण
क्रिकेटरों
के
ही
पीछे
भागते
हैं।
ऐसे
में
हॉकी
खिलाड़ियों
को
लगता
है
कि
कम
से
कम
सरकारी
स्तर
पर
तो
उनके
साथ
बराबरी
का
सलूक
हो
और
उनकी
ओर
भी
ध्यान
दिया
जाए।

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