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ढ़ाई साल में
49
बच्चों की मौत मामले में एम्स निदेशक को जांच के आदेश
एम्स में
क्लिनिकल ट्रायल के दौरान ढाई साल में
49
बच्चों की मौत के मामले में केंद्रीय
स्वास्थ्य मंत्रालय ने एम्स निदेशक को जांच के आदेश दिए हैं।
उधर,
एम्स प्रशासन का
कहना है कि बच्चों की मौत बीमारी के कारण हुई थी।
केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव
नरेश दयाल ने बताया कि इस बारे में चर्चा के बाद स्वास्थ्य
मंत्री डॉ. अंबुमणि
रामदास ने एम्स डायरेक्टर को हाई लेवल कमिटी से जांच कराकर
जल्द से जल्द रिपोर्ट
देने के लिए कहा है। उधर,
एम्स में आयोजित प्रेस कॉन्फ़रन्स में पीडियाट्रिक
डिपार्टमंट के हेड डॉ. वी. के. पॉल ने बताया कि हमने उदय
फाउंडेशन नामक एनजीओ
द्वारा फाइल की गई आरटीआई में यह बताया है था कि विभिन्न तरह
के 24
क्लिनिकल ट्रायल
के लिए इंस्टिट्यूट में रजिस्टर्ड कुल बच्चों में से
49
की मौत हुई थी,
मगर जिन
बच्चों की मौत हुई थी वे निमोनिया जैसी गंभीर बीमारियों के
शिकार थे। उनकी रोग
प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए जिंक दिया जा रहा था। उनकी मौत
की वजह सिर्फ और
सिर्फ बीमारी थी,
किसी भी नई दवा का इस्तेमाल नहीं।
उधर,
लेफ्ट और कांग्रेस
पार्टी ने भी इस मुद्दे पर जांच और इस तरह की दवाओं के ट्रायल
पर तुरंत रोक लगाने
की मांग की है। कांग्रेस के प्रवक्ता मनीष तिवारी ने कहा कि एक
साल से कम उम्र के
बच्चों पर इस तरह के प्रयोग दुर्भाग्यपूर्ण हैं। अपने बच्चों
को गिनी पिग की तरह
इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं दी जा सकती है। उल्लेखनीय है कि
उदय फाउंडेशन की
रिपोर्ट के हवाले से सोमवार को छपी खबरों में बताया गया था कि
एम्स में क्लिनिकल
ट्रायल की वजह से ढाई साल में
49
बच्चे मौत के शिकार हो गए।

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