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आदिवासी क्षेत्रों के बच्चों को स्थानीय बोली में प्राथमिक शिक्षा देने के लिए कार्ययोजना बनाई जाए- मुख्यमंत्री

 

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने राज्य के आदिवासी क्षेत्रों और सीमावर्ती जिलों के ऐसे बच्चों को जो हिंदी नही समझते, उनकी मातृ भाषा मे प्राथमिक शिक्षा देने की समुचित कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए हैं। डॉ. सिंह ने राज्य में नई पीढ़ी के व्यापक हित में प्राथमिक शिक्षा को और भी अधिक मजबूत बनाने की जरूरत पर भी विशेष रूप से बल दिया। उन्होने कहा कि प्रदेश के ऐसे जिले जो अन्य राज्यों से जुड़े हैं वहां के बच्चों को हिंदी मे पढ़ाई करने में होने वाली व्यावहारिक दिक्कतों को ध्यान में रखकर स्थानीय बोली के जानकार शिक्षकों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए और स्थानीय बोली के अनुसार पाठयक्रम बना कर बच्चों को पढ़ाया जाना चाहिए। डॉ. सिंह ने आज यहां मंत्रालय में सर्व शिक्षा अभियान के तहत राजीव गांधी शिक्षा मिशन की वार्षिक साधारण सभा की बैठक में इस आशय के निर्देश दिए। बैठक मे स्कूल शिक्षा मंत्री श्री अजय चंद्राकर, आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति मंत्री श्री गणेशराम भगत, राज्यसभा सदस्य श्री श्रीगोपाल व्यास, प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव श्री पी. जॉय. उम्मेन तथा साधारण सभा के अन्य अनेक सदस्य बैठक में उपस्थित थे।डॉ. रमन सिंह ने बैठक में प्राथमिक शिक्षा को सबसे महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह पूरी शिक्षा व्यवस्था का आधार है। इसे अत्यंत मजबूत करने की आवश्यकता है। बुनियाद सुदृढ़ होने पर आगे बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम अपने आप अच्छे आएंगे। उन्होने कहा कि कुछ बच्चों के स्कूल न आने का एक कारण मातृ भाषा मे पढ़ाई न होना भी है। इसके लिए विशेष पाठयक्रम बनाकर स्थानीय बोली के जानकार शिक्षकों को नियुक्त किया जाए। उन्होने शाला से अनुपस्थित रहने वाले शिक्षकों पर कठोर कार्रवाई करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही अच्छे शिक्षकों और अच्छी शालाओं को प्रोत्साहन भी दिया जाए। डॉ. सिंह ने शिक्षकों को लगातार गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण दिए जाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि इसके लिए सेवानिवृत अच्छे शिक्षकों की मदद भी ली जा सकती है। शहरी क्षेत्रों मे जब तक शिक्षकों की नियमित नियुक्ति नही हो रही है उस अवधि के लिए संविदा आधार पर नियुक्ति करने के निर्देश दिए जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो।स्कूल शिक्षा मंत्री श्री अजय चंद्राकर ने कहा कि स्कूल शिक्षा मे सुधार के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे है। वर्ष 2003 से अब तक 9276 प्राथमिक स्कूल, 7121 उच्च प्राथमिक स्कूल खोले गए है। विभाग का सेट अप तैयार हो गया है। कुल स्वीकृत 50786 शिक्षकों के पदों मे से 47 हजार से अधिक मे भर्तियां की गई हैं। सभी स्कूलों मे पीने के पानी ,शौचालयों ,बिजली आदि की व्यवस्था की जा रही है। गत वर्ष सर्व शिक्षा अभियान के तहत प्राप्त 751 करोड़ का शत प्रतिशत उपयोग किया गया। गत वर्ष स्कूलों के भवन निर्माण, अतिरिक्त कमरे निर्माण आदि पर 217 करोड़ रूपये से अधिक खर्च किए गए। बैठक मे राज्यसभा सांसद श्रीगोपाल व्यास ने ज्ञान ज्योति स्कूलों की संख्या और बढ़ाने तथा स्थानीय बोलियों मे पढ़ाई के अलावा छत्तीसगढ़ी भाषा को भी प्रोत्साहन देने का सुझाव दिया। बैठक मे सचिव स्कूल शिक्षा श्री नंद कुमार ने बताया कि शाला त्यागी बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए वैकल्पिक व नवाचारी शिक्षा का सहारा लिया जा रहा है। गैर आवासीय व आवासीय सेतु पाठयक्रम से 85772 बच्चों को, नाइट शेल्टर से 1272 बच्चों को लाभ मिला है। इसके अलावा नवसाक्षर बच्चों को आगे पढ़ाने के लिए समतुल्यता कार्यक्रम चलाया गया। उन्होने बताया कि प्रदेश के सभी 93 कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालयों मे लगभग शत-प्रतिशत नामांकन है। प्रदेश मे हाई और हायर सेकेन्डरी स्कूलों की एक लाख 80 हजार से अधिक बालिकाओं को कंम्प्यूटर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। पूरे देश मे छत्तीसगढ़ का यह अभिनव प्रयास सराहा गया है। इस वर्ष 48 लाख से अधिक पाठयपुस्तकों का नि:शुल्क वितरण किया गया।बैठक मे संसदीय सचिव डॉ. सुभाउ कश्यप और राज्य समाज कल्याण बोर्ड की अध्यक्ष श्रीमती हेमलता चंद्राकर सहित श्री चंद्रभूषण मिश्रा, श्री अजय त्रिपाठी तथा अन्य अनेक सदस्यों ने भी कई सुझाव दिए। बैठक मे प्रमुख सचिव वित्त श्री डी.एस. मिश्रा, संचालक राजीव गांधी शिक्षा मिशन श्रीमती मनिंदर कौर द्विवेदी, संचालक राज्य शैक्षणिक अनुसंधान केन्द्र श्रीमती निधि छिब्बर तथा अन्य सदस्य उपस्थित थे।

 

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