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नक्सली क्षेत्रों के लिए विशेष कार्ययोजना
रायपुर.
नक्सलियों के खिलाफ पुलिस का ज्वाइंट ऑपरेशन तेज करने के साथ ही
राज्य शासन ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए विशेष
कार्ययोजना तैयार की
है। इसके तहत पुलिस कार्रवाई के साथ ही संबंधित क्षेत्रों में
विकास कार्य कराए
जाएंगे। योजना के तहत सालभर में
9
हजार
783
करोड़
80
लाख रुपए खर्च किए
जाएंगे।
बस्तर के जंगलों में सुरक्षा बलों का संयुक्त अभियान चल रहा है। इस
कारण राज्य
सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में अधोसंरचना के विकास पर ध्यान
केंद्रित किया है।
राज्य सरकार ने पहले अधोसंरचना के लिए
3500
करोड़ रुपए की कार्ययोजना तैयार की थी,
लेकिन ज्वाइंट ऑपरेशन के तेज होने के साथ ही इस मद में अतिरिक्त
राशि की आवश्यकता
महसूस की गई।
इसलिए
9
हजार
783
करोड़ रुपए की कार्ययोजना को अंतिम रूप दिया गया। राज्य योजना
आयोग के उपाध्यक्ष डीएन तिवारी ने बताया कि इस मद में पहले केंद्र
सरकार ने केवल
सड़क,
पुल और बिजली के लिए राशि देने की सहमति दी थी। इससे विकास के सारे
कार्य
नहीं हो सकते थे।
नक्सलियों ने
1300
से अधिक स्कूल भवनों को उड़ा दिया है। दर्जनों अस्पतालों के
भवन क्षतिग्रस्त हैं। आश्रम शालाओं को तहस-नहस कर दिया है। कई
प्रमुख सड़कों को
नक्सलियों ने खोद डाला है। रेस्ट हाउस और सामुदायिक भवनों को
विस्फोटकों से उड़ा
दिया है। पेयजल के लिए लगाए गए हैंड पंप भी किसी काम के नहीं बचे।
पुलिस थानों के भवन नहीं बन पाए हैं। पंचायत एवं पटवारी कार्यालयों
को वापस खड़ा
करना है। इन जरूरतों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह
ने केंद्र को
पत्र लिखकर विकास के लिए सभी मदों में राशि की आवश्यकता बताई। इस
आधार पर अधोसंरचना
विकास की कार्ययोजना केंद्र को भेजी जा रही है।
राज्य सरकार की योजना के अनुसार आम लोगों को राहत देने के अलावा
प्रशासन को
दोबारा उन क्षेत्रों में खड़ा करने की योजनाओं को प्राथमिकता दी गई
है। योजना आयोग
से इन योजनाओं को मंजूरी मिलने के बाद काम शुरू कर दिया जाएगा। इन
योजनाओं के तहत
बस्तर,
कांकेर,
दंतेवाड़ा,
नारायणपुर,
बीजापुर,
राजनांदगांव और सरगुजा जिले में काम
कराए जाएंगे।
ये सारी योजनाएं वित्तीय वर्ष
2010-11
के लिए हैं। केंद्र सरकार से राशि मिलते
ही प्रभावित क्षेत्रों में काम करने के लिए एजेंसी तय की जाएंगी।
इसमें एक परेशानी
भी आएगी। जिन क्षेत्रों में पुलिस की पहुंच है और सुरक्षा व्यवस्था
है वहां तो काम
कराना संभव होगा,
लेकिन जिन क्षेत्रों में अभी पुलिस की पकड़ नहीं बनी है,
वहां काम
कराने में परेशानी भी आ सकती है।
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