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मनगढ़ हादसा में आयोजकों पर मामला दर्ज

 

 उत्तार प्रदेश में प्रतापगढ़ जिले के भक्तिधाम मनगढ़ आश्रम में हुए हादसे को लेकर कार्यक्रम के आयोजकों पर सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही बरतने की रिपोर्ट दर्ज हुई है। हालांकि दर्ज मामले में किसी के नाम का जिक्र नहीं है। अधिकारियों के अनुसार, पुलिस विवेचना के बाद इसमें नाम शामिल किए जाएंगे।

कुंडा कोतवाली क्षेत्र के मनगढ़ धाम आश्रम में चार मार्च को कृपालु महाराज की पत्‍‌नी पद्मा देवी की बरसी मनाई जा रही थी। इस मौके पर उपहार लेने के लिए हजारों ग्रामीणों का जमावड़ा था। पूर्वान्ह लगभग सवा 11 बजे यहां उपहार वितरण परिसर का गेट टूट जाने से भगदड़ मच गई। इस हादसे में 63 लोगों की जान चली गयी थी और 200 से अधिक लोग घायल हुए थे। इतने बड़े हादसे के बाद चारों तरफ जब पुलिस प्रशासन और मनगढ़ मंदिर प्रबंधन व आयोजकों की किरकिरी होने लगी तो पुलिस हरकत में आई। मनगढ़ चौकी इंचार्ज दयाशंकर तिवारी की तहरीर पर कार्यक्रम के आयोजकों और प्रबंधकों के खिलाफ कुंडा कोतवाली में धारा 304 [ए] के अंतर्गत रिपोर्ट दर्ज कर ली गई, जिसमें आरोप लगाया गया है कि आयोजकों ने इतनी बड़ी भीड़ होने की सूचना पुलिस को नहीं दी थी। सुरक्षा को लेकर मंदिर प्रबंधन की ओर से भी कोई ठोस इंतजाम नहीं किए गए थे। इसी लापरवाही के चलते भीड़ के दबाव से गेट टूट गया और बड़ी संख्या में लोग बेमौत मारे गए। कुंडा कोतवाल रमेश प्रताप का कहना है कि एफआईआर में अभी किसी का नाम नहीं है, लेकिन आयोजकगण शब्द का उल्लेख है। इसमें वे सभी लोग घेरे में आ सकते हैं, जो किसी भी रूप में इस आयोजन से जुडे़ रहे हैं।

पहले ही दी गई थी आयोजन की सूचना

भक्तिधाम के प्रवक्ता ने प्रशासन की उस दावे को गलत ठहराया है, जिसमें आयोजन की पूर्व जानकारी नहीं देने की बात कहीं गई है। प्रवक्ता का कहना है कि आयोजन के संबंध में प्रशासन को पहले ही सूचना दे दी गई थी।

कहां हुई चूक, टटोलने में जुटे मंडलायुक्त

इलाहाबाद, जागरण संवाददाता। प्रतापगढ़ के मनगढ़ हादसे में 63 लोगों की मौत मामले की जांच शुक्रवार से शुरू हो गई। शासन के आदेश पर मंडलायुक्त अजय कुमार उपाध्याय जांच करने भक्तिधाम आश्रम पहुंचे। घटनास्थल का निरीक्षण कर मंदिर प्रशासन के अधिकारियों से पूछताछ की। स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों से भी उन्होंने वार्ता की। इसके अलावा आश्रम स्थित चिकित्सालय में भर्ती घायलों का हालचाल लेने के साथ ही उनसे भी बातचीत की।

मनगढ़ हादसे की जांच मंडलायुक्त अजय कुमार उपाध्याय को सौंपी गई है। गुरुवार देर रात वे दिल्ली से लौटे और शुक्रवार सुबह मनगढ़ पहुंच गए। सर्वप्रथम वह घटनास्थल पर गए। यहां टूटे गेट का निरीक्षण किया। जहां भक्तगण जुटे थे, वहां पहुंचकर उन्होंने देखा कि भीड़ के मुताबिक यह स्थान पर्याप्त था या नहीं। इसके बाद उन्होंने मंदिर प्रशासन के कुछ अधिकारियों से अलग-अलग पूछताछ की। बाद में आईजी इलाहाबाद चंद्र प्रकाश, जिलाधिकारी प्रतापगढ़, एसपी प्रतापगढ़ से भी वार्ता की। कुंडा एसडीएम से भी पूछताछ की गई। उन्होंने कुंडा कोतवाली में कार्यक्रम आयोजक शिव कुमार व मंदिर प्रबंधक हिरण्यमय चटर्जी का बयान भी लिया। घटना के बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी कब पहुंचे, इसे भी दर्ज किया।

सूत्रों की माने तो लगभग 12 बिंदुओं पर जांच पड़ताल की जा रही है। मंडलायुक्त ने इस ओर अपना ध्यान केंद्रित कर लिया है। शासन को भी प्रथम चरण की रिपोर्ट शनिवार शाम तक भेजे जाने की संभावना है। इस बाबत मंडलायुक्त अजय कुमार उपाध्याय ने कहा कि जांच शुरू कर दी गई है। कुछ बिंदुओं को खंगाला जा रहा है। हालांकि उन्होंने उन बिन्दुओं को बताने से इन्कार कर दिया। शासन को रिपोर्ट कब भेजी जाएगी, इस बारे में भी उन्होंने कुछ भी साफ-साफ नहीं कहा। इतना जरूर कहा कि जल्द ही रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। सूत्रों के मुताबिक जिन बिंदुओं पर जांच हो रही है वे इस प्रकार हैं-

1. मनगढ़ भक्तिधाम मंदिर में कितनी भीड़ थी।

2. आयोजन की सूचना पुलिस-प्रशासन को दी गई थी या नहीं।

3. अगर सूचना दी गई थी तो अनुमति मिली थी या नहीं।

4. भीड़ को नियंत्रित करने की मंदिर प्रशासन ने क्या व्यवस्था की थी।

5. मंदिर प्रशासन के कितने सुरक्षाकर्मी तैनात थे।

6. सूचना के कितने देर बाद पुलिस और प्रशासन के अधिकारी पहुंचे।

7. स्थानीय थाने और तहसील के अधिकारी कब पहुंचे।

8. पहले हुए आयोजनों की जानकारी प्रशासन को दी जाती थी या नहीं।

9. आश्रम के किन-किन लोगों पर इसकी जिम्मेदारी थी।

10. भीड़ जहां जुटी थी, वहां क्षमता कितनी है।

11. गेट कैसे गिरा और भगदड़ कैसे मची

12. इतनी भीड़ आने की जानकारी पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों को कैसे नहीं लगी।

मनगढ़ में ही हैं कृपालु महाराज

मनगढ़, जागरण संवाददाता। जिस भक्ति धाम में गुरुवार तक हर ओर राधे-राधे की गूंज सुनाई पड़ती थी। वहां शुक्रवार को भक्तजन से अधिक पुलिस तैनात थी। कृपालु महराज पैर में फ्रैक्चर होने के कारण जिस कक्ष में आराम कर रहे हैं, उसके और भक्ति धाम के मुख्य गेट पर पुलिस तैनात है। किसी को उधर से आने नहीं दिया जा रहा है। कृपालु चिकित्सालय के सामने से जाने वाली सड़क पर भी पुलिस तैनात है। अस्पताल के आगे लोगों को बढ़ने नहीं दिया जा रहा है।

घटना के दूसरे दिन जो भक्त बचे हैं, वह साधना तो कर रहे हैं, लेकिन भारी पुलिस बल देखकर वे भी चौकन्ने हैं। पूरा भक्ति धाम छावनी बन गया है। इस बारे में भक्ति धाम के आयोजकों ने बताया कि घटना से सभी दुखी हैं। वृंदावन में छह तारीख को साधु भोज का आयोजन किया गया है, इसलिए अधिकांश भक्त वहीं चले गए हैं। कृपालु महराज के अस्वस्थ हो जाने से वे उनका प्रवचन नहीं सुन पा रहे हैं। जबसे उनका पैर फ्रैक्चर हुआ है, तबसे भक्ति धाम में केवल उनके कैसेट सुनाए जा रहे हैं।

बिना अनुमति आयोजन हुए तो होगी कार्रवाई

लखनऊ, जागरण ब्यूरो। प्रतापगढ़ स्थिति कृपालु महाराज के भक्तिधाम आश्रम की घटना को गंभीरता से लेते राज्य सरकार ने भविष्य में सार्वजनिक स्थलों पर बिना अनुमति के धार्मिक आयोजन किए जाने पर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। एडीजी कानून-व्यवस्था बृजलाल ने शुक्रवार को पत्रकारों को बताया कि वैसे तो सार्वजनिक स्थलों पर होने वाले हर कार्यक्रम में कानून-व्यवस्था पर नजर रखने की जिम्मेदारी प्रशासन की होती है, किंतु आयोजन जब विशेष हो और वहां अप्रत्याशित भीड़ आने की संभावना हो तो प्रशासन की पूर्व अनुमति लेना जरूरी होता है। भविष्य में अब ऐसे आयोजन बिना अनुमति के हुए तो सख्त कार्रवाई होगी।

कल की घटना के बारे में एडीजी ने बताया कि आयोजकों ने पुलिस को हलके ढंग से सूचना दी थी, फिर भी संबंधित चौकी की पुलिस वहां मौजूद थी, जो अचानक भीड़ के आ जाने पर उसे संभाल न पाई। उन्होंने बताया कि कुंडा थाने से घटनास्थल चूंकि दूर है, इसलिए थाने की पुलिस वहां तत्काल नहीं पहुंच सकी। फिर भी मंडलायुक्त की जांच रिपोर्ट का इंतजार है। रिपोर्ट मिलने के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सरकार की तरफ से किसी प्रकार की आर्थिक सहायता देने के बारे में भी फैसला मंडलायुक्त की रिपोर्ट मिलने के बाद ही किया जाएगा। अपर पुलिस महानिदेशक ने बताया कि कल की घटना में 63 लोगों की मृत्यु हुई है, जिसमें 37 बच्चे हैं। सबका पोस्टमार्टम कराया गया है। तीन को छोड़कर शुक्रवार को सभी का अंतिम संस्कार कर दिया गया है। जहां तक आयोजकों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात है उन्होंने बताया कि आश्रम के प्रबन्धकों तथा आयोजकों के खिलाफ कुंडा थाने में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है जिसकी विवेचना जारी है। रिपोर्ट में आश्रम के मालिक कृपालु महाराज को नामजद न करने का कारण पूछने पर उन्होंने बताया कि आयोजकों में सब आ जाते हैं। विवेचना में जिस किसी का नाम सामने आयेगा, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होगी।

वैसे राजधानी में आज यह आम चर्चा रही है कि 'बाबा के शिष्यों में' कई बड़ी राजनीतिक हस्तियां शामिल हैं, इसीलिए 63 लोगों की मौत के बावजूद मामूली जमानती धारा में मुकदमा दर्ज कराया गया है। आमतौर पर इस धारा का प्रयोग मोटर दुर्घटना अधिनियम के तहत तब किया जाता है, जब चालक की लापरवाही से किसी की मृत्यु हो जाती है।

 

 

 

 

 


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