इंडियन न्यूज सर्विस

Indian News Service

   राष्ट्रीय समाचार एजेंसी

00 समाचार एवं विचार का दैनिक पत्र 00

 मुख्य पृष्ठ

  आंचलिक

  राष्ट्रीय

  अंतरराष्ट्रीय

  राजनीति

  क्रीडा

  समाज

  साहित्य

  प्रौद्योगिकी

  व्यक्तित्व

 लोक-अभिरुचि

  पर्यटन

  फीचर्स

  फोटोग्राफ

  वीडियो

 सदस्य कैसे बनें

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

वी.सी. शुक्ल कल से आज तक उत्साह बरकरार

रमाकांत  शर्मा

पंडित शुक्ल जी का परिवार मध्यप्रदेश की राजनैतिक सांस्कृति धारा में इस प्रकार घुल मिल गया है, कि बहुत से लोगों को यह जानकारी भी नहीं कि शुक्ल के पूर्वज आज से लगभग दो सौ पचास वर्ष पूर्व उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले मे स्थित  ग्राम टेढ़ा बीघापुर से मध्यप्रदेश आए थे। पंडित शुक्ल के पूर्वज पहले ग्वालियर आए और उसके बाद सागर पहुँचे । सागर जिला श्री शुक्ल के परिवार का दूसरा गृह जिला बना ।उच्च शिक्षा और स्वतंत्रा श्री शुक्ल के परिवार को नागपूर तथा रायपुर से जुडे़  रहने के कारण श्री शुक्ल के परिवार का मध्य भारत बुदेलखण्ड महाकौशल  तथा छत्तीसगढ़ के अटूट सबंध रहा  तथा सभी क्षेत्रों की सामाजिक सांस्कृतिक स्थित को समझने का अवसर प्रदान हुआ । यही कारण हैं कि वह प्रदे्श के अकेले ऐसे नेता है, जो  मध्यप्रदेश के कोने कोने से इस प्रकार परिचित है। जैसे वह उनके ही घर का कोई कमरा  या हिस्सा हो।

नए मध्यप्रदेश के निर्माण के सूत्रधार प्रदेश राजनीति के भीष्म पितामह एवं मध्यप्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री पंडित  रविशंकर  शुक्ल के सबसे छोटे एवं भूतपूर्व  मुख्यमंत्री श्यामाचरम शुक्ल को स्वतंत्रता आंदोलन के साथ जुडे हुए मूल्य यथा, रामराज्य ,जनतंत्र, और धर्मनिरपेक्षता  विरासत में मिले इस महान राजनैतिक परपंरा ने श्री शुक्ल को राजनीतिक में पैर जमाने मे सहायता की। किन्तु साथ ही उनके अनेकों बंधन बांध दिए ओर सीमा रेखांए भी खींच दी।

क्योकि शुक्ल के परिवार के राजनैतिक उत्तराधिकारी होने के नाते उन्हे वह सब करने की छूट नही थी  जिसे करके आठवे दशक प्रांरभिक वर्षों में अनेक लोग कांग्रेस से दूर दराज का सबंध नही था राजनीति मे शिखर पदों पर आसीन हुए  ये वो लोग थे जिनके साथ कोई विरासत ,राजनैतिक परंपरा या मूल्य नहीं जुडे़ थे अवसरवादिता जिनके लिए साधन और साध्य दोनों ही थी।

विघाचरण शुक्ल आश्चर्यजनक रूप से मध्यप्रदेश शासन में कभी भी किसी भी लाभ या प्रभाव के पद पर  नही रहें राष्ट्रीय राजनीति का केन्द्र दिल्ली ही उनकी राजनीतिक गतिविधियों का केन्द्र  रहा  फिर भी अपने प्रांत मध्यप्रदेश में उनका  एक सशक्त व ठोस  जनाधार रहा है। अपने इस जनाधार को प्रदर्शित करने की अथवा पत्र पत्रिकाओं  के द्रारा प्रचरित करने की कभी आवश्यकता महसूस नहीं की  इसी ठोस जनाधार के कारण श्री शुक्ल ने 9 बार सांसद एवं कई वर्षों  तक केन्द्रिय मंत्री पद पर रहते हुए संसद में ग्यारह हजार दिन पूरे किए।

माननीय शुक्ल का जनाधार वो गाँव शहर एवं गली कूंचे हैं जहाँ पंडित विघाचरण शुक्ल विघा भैया के नाम से जाने एवं पुकारे जाते है। स्पष्ट है भैया शब्द में जो आत्मीयता , अपनापन और जुड़ाव की जो भावना है। वह महाराजा कुंवर साहब या राजासाहब के संबोधन मे नही है। पंडित शुक्ल के संबंध अपने कार्यकर्ताओं से जिस प्रकार के रहें हैं। ये भारत के किसी भी दूसरे नेता के लिए एक आर्दश प्रस्तुत करते हैं । देश काल एवं समय की सीमांए उन्हें अपने कार्यकर्ताओं से दूर न ऱख सकी सैकड़ों अवसरों हजारों बाबुओं एवं लाखों फाइलों का दबाव भी उन्हें अपने कार्यकर्ता से दूर न कर सकी  आठवें दशक के प्रांरभिक वर्षों में एक विशेष प्रकार राजनैतिक संस्कृति मध्यप्रदेश में विकसित हुई तपे हुए कांग्रेसी नेता कार्यकर्ता घर बैठा दिए गए। और  उनका स्थान  हुजरो  मुजरों एवं जाति विशेष के चाटुकारों ने ले लिया । पंडित रविशंकर शुक्ल  पड़ित कैलाश नाथ काटूज . तखतमल जैन और भगवन्तराव मण्डलोई जैसे दिग्गजों द्वारा संस्कारित राजनैतिक दलमें इस सामन्त शाही का विरोध होना ही था यह विरोध स्वतः  स्फूर्ति  था तथा किसी भी प्रकार से संरक्षित या प्रायोजित नहीं ता किन्तु अपने राजनैतिक हितों की परवाह न करतें हुए श्री शुक्ल दिल्ली से मध्यप्रदेश आए एवं सांमत शाही के खिलाफ उठ रहें इन सुरों को अपना नेतृत्व प्रदान किया। दुर्भागय से अपनी इस शाफगोई की बहुत बडी कीमत श्री शुक्ल को कई वर्षों तक चुकानी पड़ी उतने ही अधिक दुर्भागयशाली रहें मध्यप्रदेश के निवासी जिन्हें अपनें प्रदेश की राजनीति के गिरतें हुए मूल्यों को निर्विकार भाव से देखने के लिए विवश होंना  पड़ा  नेता अपने हितों के लिए कार्यकताओं के लिए किसी शिखर राजनैतिक का इतना बड़ा त्याग आज पर्यन्त देखने को नहीं मिंला जातिवाद एवं सामंतवाद  के विरूध्द पंडित शुक्ल का यह संग्राम पार्टी के अंदर व बाहर आज भी जारी है।

66वर्ष की उम्र में भी श्री शुक्ल जी जितनी भागदौड़ व परिश्रम करतें हैं वह अद्वितीय व सराहनीय है। मझे पिछले उप चुनाव में विदिशा व हटा के दौरे के समय पैंर में गंभीर चोंटे होने के बावजूद भी श्री शुक्ल ने धूल व कीचड़ भरें रास्तों को पार करते हुए रात को दो-दो बजे तक आम सभाएं ली ये प्रदेश में उनकी लोप्रियता है कि जिस गांव में दिन का 2 बजे का समय निर्धारित था वह रात्रि 1 बजे का समय निर्झारित था तो वहाँ रात्रि 1 बजे भी हजेरों की संख्या में लोग उपस्थित थें केवल एर ही लालसा लिए हुए कि भैया के दर्शन हो जावें ।

आज देश में धार्मिक उन्माद अपनी चरमसीमा  पर है जातिवादी राजनेता जाति सांप्रदायिकता  को धार्मिक सांप्रदायिकता से जोड़कर अपने स्वार्थ पूरे करने के प्रयास में लगे हुए है। यह देश का दुर्भाग्य है 108 वर्षो  पुरानी राजनैतिक संस्थाओं में भी इस प्रकार के लोगों की घुसपैठ हो गई है। इन हालातों मे  श्री शुक्ल को  मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के अपनी जिम्मेंदारी एवं दायित्तव के  अलावा भी अन्य कई महत्तवपूर्ण जिम्मेदारियाँ  सौंपी  गई है।  जिनका  निर्वाह वे अपनी शैली में कर रहें है। जिस शैली की विशेषता प्रचार से दूर सघन जनसम्पर्क के द्वारा ठोंस काम करनें की रही हैं।

इस चुनौतीपूर्ण समय में श्री शुक्ल के साथ पूरे प्रदेश की जनता एवं कांग्रेसी कार्यकर्ता पूर्ण सहयोंग  व कंधे से कंधे मिलाकर उनके साथ है

 

 

 

कार्यालय

संपादक, इंडियन न्यूज़ सर्विस, बाम्बे मार्केट, रायपुर, छत्तीसगढ़, मोबाईल- 09329024410, फोन- 0771-4269875, ई-मेल- editorins@gmail.com

 

 

सर्वाधिकार सुरक्षित © www.indiannewsservice.com

वेब-डिजाइन - कामिनी इन्फार्मेटिक्स के लिए प्रशांत रथ