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सपनों में भरें रंग
संजय द्विवेदी
पूर्व राष्ट्रपति डा. एपीजे अब्दुल कलाम ने जब देश को
2020
में महाशक्ति बन जाने का सपना दिखाया था,
तो वे एक ऐसी हकीकत बयान कर रहे थे,
जो जल्दी ही साकार होने वाली है। आजादी के
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दशक पूरे करने के बाद भारतीय लोकतंत्र एक ऐसे मुकाम पर है,
जहां से उसे सिर्र्फ आगे ही जाना है। अपनी एकता,
अखंडता और सांस्कृतिक व नैतिक मूल्यों के साथ पूरी हुई इन
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दशकों की यात्रा ने पूरी दुनिया के मन में भारत के लिए एक आदर
पैदा किया है। यही कारण है कि हमारे युवा भारतवंशी दुनिया के
हर देश में एक नई निगाह से देखे जा रहे हैं। उनकी प्रतिभा का
आदर और मूल्य भी उन्हें मिल रहा है। आजादी के लड़ाई के मूल्य आज
भले थोड़ा धुंधले दिखते हों या राष्ट्रीय पर्व औपचारिकताओं में
लिपटे हुए,
लेकिन यह सच है कि देश की युवा शक्ति आज भी अपने राष्ट्र को
उसी जज्बे से प्यार करती है,
जो सपना हमारे सेनानियों ने देखा था।
आजादी की जंग में जिन नौजवानों ने अपना सर्वस्व निछावर किया,
वही ललक और प्रेरणा आज भी भारत के उत्थान के लिए नई पीढ़ी में
दिखती है। हमारे प्रशासनिक और राजनीतिक तंत्र में भले ही
संवेदना घट चली हो,
लेकिन भारतीय युवा आज भी बेहद ईमानदार और नैतिक हैं। वह सीधे
रास्ते चलकर प्रगति की सीढ़ियां चढ़ना चाहते हैं। यदि ऐसा न होता
तो विदेशों में जाकर भारत के युवा सफलताओं के इतिहास न लिख रहे
होते। जो विदेशों में गए हैं,
उनके सामने यदि अपने देश में ही विकास के समान अवसर उपलब्ध
होते तो वे शायद अपनी मातृभूमि को छोड़ने के लिए प्रेरित न
होते। बावजूद इसके विदेशों में जाकर भी उन्होंने अपनी प्रतिभा,
मेहनत और ईमानदारी से भारत के लिए एक ब्रांड एंबेसेडर का काम
किया है। यही कारण है कि सांप,
सपेरों और साधुओं के रूप में पहचाने जाने वाले भारत की छवि आज
एक ऐसे तेजी से प्रगति करते राष्ट्र के रूप में बनी है,
जो तेजी से अपने को एक महाशक्ति में बदल रहा है। आर्थिक
सुधारों की तीव्र गति ने भारत को दुनिया के सामने एक ऐसे
चमकीले क्षेत्र के रूप में स्थापित कर दिया है,
जहां विकास की भारी संभावनाएं देखी जा रही हैं। यह अकारण नहीं
है कि तेजी के साथ भारत की तरफ विदेशी राष्ट्र आकर्षित हुए
हैं। बाजारवाद के हो-हल्ले के बावजूद आम भारतीय की शैक्षिक,
आर्थिक और सामाजिक स्थितियों में व्यापक परिवर्तन देखे जा रहे
हैं। ये परिवर्तन आज भले ही मध्यवर्ग तक सीमित दिखते हों,
इनका लाभ आने वाले समय में नीचे तक पहुंचेगा। भारी संख्या में
युवा शक्तियों से सुसाित देश अपनी आंकाक्षाओं की पूर्ति के लिए
अब किसी भी सीमा को तोड़ने को आतुर है। युवा शक्ति तेजी के साथ
नए-नए विषयों पर काम कर रही है,
जिसने हर क्षेत्र में एक ऐसी प्रयोगधर्मी और प्रगतिशील पीढ़ी
खड़ी की है,
जिस पर दुनिया विस्मित है।
सूचना प्रौद्योगिकी,
फिल्में,
कृषि और अनुसंधान से जुड़े क्षेत्रों या विविध प्रदर्शन कलाएं
हर जगह भारतीय युवा प्रतिभाएं वैश्विक संदर्भ में अपनी जगह बना
रही हैं। शायद यही कारण है कि भारत की तरफ देखने का दुनिया का
नजरिया पिछले एक दशक में बहुत बदला है। ये चीजें अनायास और
अचानक घट गईं हैं,
ऐसा भी नहीं है। देश के नेतृत्व के साथ-साथ आम आदमी के अंदर
पैदा हुए आत्मविश्वास ने विकास की गति बहुत बढ़ा दी है।
भ्रष्टाचार और संवेदनहीनता की तमाम कहानियों के बीच भी विश्वास
के बीज धीरे-धीरे एक वृक्ष का रूप ले रहे हैं। अपनी स्वभाविक
प्रतिभा से नैसर्गिक विकास कर रहा यह देश आज भी एक भगीरथ की
प्रतीक्षा में है,
जो उसके सपनों में रंग भर सके। भारत को महाशक्ति बनाना है,
तो वह हर भारतीय की भागीदारी से ही सच होने वाला सपना है। देश
के तमाम वंचित लोगों को छोड़कर हम अपने सपनों को सच नहीं कर
सकते। क्या हम इस जिम्मेदारी को उठाने के लिए तैयार हैं?
(लेखक
हरिभूमि रायपुर के स्थानीय संपादक हैं)

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