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बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी श्री चन्द्रशेखर साहू

 

बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी श्री चन्द्रशेखर साहू (चम्पू भैया) का जन्म, रायपुर जिला में अभनपुर विकास खण्ड ग्राम मानिकचौरी में 2 जुलाई 1956 को हुआ । आप की प्रारंभिक शिक्षा गांव में ही हुई । तत्पश्चात् आप ने भू-विज्ञान में स्नातक की उपाधि तथा ग्रामीण विकास में डिप्लोमा प्राप्त की बाल्य काल से ही इन्हें गाव और खेती किसानी के प्रति लगाव रहा इसीलिए उन्हे छ..का माटी पुत्र कहा जाता है ।

श्री चंद्रशेखर साहू की रूचि कृषि के साथ समाज सेवा ग्रामीण विकास तथा राजनैतिक के माध्यम से छ.ग. के गरीब किसानो के प्रति रही है । उन्होने सन् 1975 से 1977 के बीच जनपद पंचायत आंदोलन में सर्किय भूमिका निभायी सन् 1978 से वे अभनपुर विकास खण्ड के जनपद पंचायत अध्यक्ष निर्वाचित हुए । इस दौरान अभनपुर विकास खण्ड के विकास कार्यो को उन्नति की और ले जाने में पद प्रर्दषक का काम किया । सन् 1980-81 में राष्ट्रीय सहकारी संस्था इस्को के प्रतिनिधि चुने गये । श्री साहू 1985 में हुए आम चुनाव में इंदिरा लहर के बावजुद अभनपुर विधानसभा के भा.ज.पा. के विधायक चुने गये तथा 1990 तक म.प्र.विधान सभा के सदस्य चुने गये तथा 1990 में ग्रामीण विकास के लिए छ.ग.समग्र विकास संस्थान नामक स्वेछिक संगठन की स्थापना की जो अभी भी संचालित है । वे 1990 से 1993 तक म.प्र.विधानसभा के दूसरी बार सदस्य रहे। इस दौरान उन्होने अभनजिले के सभी क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बनाई ,परिणाम स्वरूप 1994 में महासमुंद के लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र उन्हें टिकट दिया गया किंतु लगभग 20 हजार वोटों से पिछड़ गये । इसी तरह 1996 के लोकसभा के चुनाव में मात्र 6700 वोटो से जीत से पीछे रहें । श्री साहू 1995-96 में भारतीय जनता युवा मोंर्चा, राष्ट्रीय युवा नीति के राज्य संयोजक और म.प्र.भा.ज.पा.के युवा सचिव रहे । सन् 1997-99 के बीच उन्होंने म.प्र.भा.ज.पा. किसान मोंर्चा के अध्यक्ष पद का दायित्व संभाला ।

      श्री साहू 1998 में हुए लोक सभा चुनाव में पहली बार लोकसभा के सदस्य निर्वाचित हुए वे करीब 47000 हजार वोटों से विजयी हुए । यद्यपि 1999 में हुए 13 वे लोकसभा चुनाव में उन्हें म.प्र.के भूतपूर्व मंत्री से हार का सामना करना पडा । सन् 2002 में डॉ रमन सिंह के अध्यक्ष काल में उन्हें छ.ग. भा.ज.पा का महासचिव नियुक्त किया गया । वे म.प्र. विधान सभा के लोकलेखा समिति के अध्यक्ष भी रहें । इसके आलावा अभी अविभाजित म.प्र. में भाजपा के महासचिव तथा भाजपा विधान मंडल के संचेतक रहे उस दौरान उनके प्रर्दशन को एक प्रेरणात्मक एवं सर्किल विधायक के रूप में सम्मानित किया गया । 1987-88 में उन्हें श्रेष्ठ उत्कृष्ठ विधायक के रूप में सम्मानित किया गया । श्री चंद्रशेखर साहू की रूचि शुरू से ही साहित्य, लेखन पत्रकारिता तथा अध्यन में रहीं है । अपने राजनैतिक व्यवस्ता के बावजुद वे लेखन से निरंतर जुडे रहे है । वर्ष 2000 में उनके द्वारा लिखित पुस्तक ‘’अंकाल मुक्त ‘’छत्तीसगढ का विमोचन तत्कालीन केन्द्रीय मंत्री श्री नितिश कुमार द्वारा किया गया । वे वर्ष 2001 में रायपुर एवं भोपाल से एक साथ प्रकाशित होने वाली हिन्दी दैनिक समाचार पत्र राष्ट्रीय हिन्दी मेल के सलाहकार संपादक रहें । उन्होनें हैदराबाद स्थित नेशनल इंस्टीयूट ऑफ स्मार्ट गर्वमेंट में आयोजित कार्यशाला में भाग लिया श्री साहू 2004 से 2006 जनवरी तक छ.ग.लोक सेवा आयोग के सदस्य रहने के पश्चात् स्वेच्छा से त्याग पत्र देकर पुन: सार्वजनिक जीवन में समय देने का निर्णय लिया । वे दिल्ली से प्रकाशित राष्ट्रीय स्तर के साप्ताहिक आरगानिजर के संवाददाता है । छ.ग.में पहली बार संचालित ग्रामीण सूचना सेवा(टी.आर.आई.) तथा गांव के लिए पोर्टल संमग्र info.com  के निर्देशन से भी जुडे है ।

      श्री चंद्रशेखर साहू फरवरी 2007 से छ.ग.राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के अध्यक्ष पद का दायित्व संभाल रहें है । श्री साहू के अध्यक्ष काल में पहली बार राष्ट्रीय स्तर की 14 जून से 15 जून को दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया जिसमें देश भर के कृषि एवं बीज विशेषज्ञ एवं कृषि वैज्ञानिक सम्मानित हुए । छ.ग. में किसानो को अच्छी गुणवत्ता उन्नत किस्म के बीज उपलब्ध कराने के लिए वे अत्यधिक प्रयत्नशील है । इस संबंध में विशेष अध्ययन के लिए वे हाल ही में हालैण्ड,फ्रांस और बेलजियम गये थे ।हमारे संवाददाता से बातचीत  में उन्होंने बताया वहां पर उघोगों की स्थापना के बजाय कृषि आधारित उघोगों को प्राथमिकता दी जाती है । इससे उन्हें प्रदूषण से मुक्ति मिलती है । वहां की प्रकृति में  स्वच्छ वातावरण  रहता है। उन्होंने विदेश भ्रमण का अनुभव बताया हौलेण्ड हो या बेलजियम या फ्रांस के किसानों की स्थिती बहुत अच्छी हैं वे समृध्दशाली है। वहां प्रत्येक किसान के पास कम-से-कम 50 से 80 एकड़ जमीन है । और वहां के किसान किसान कई प्रकार की फसल की पैदावार करते है । उनके खेतों में बिना अनुमति के प्रवेश नही कर सकते न फसल की तस्वीर उतारी जा सकती है,न वहां के बहुराष्ट्रीय कंपनियों को कृषि मामलें से दूर रखते हैं । उनसे बीजों की खरीदी-बिक्री  का संबंध लगभग नही के बराबर है । कृषि को विकसित करनें और राष्ट्र की मुख्य धारा से जोंडना की कोंशिश लगातार होती है, साहू जी ने बताया बर्मन में कार्यक्रम का आयोजन किया किया गया था ,जो फ्रांस की राजधानी से 70 किमी. दूर पर स्थित है। यहां पर कई देशों से 60 प्रतिनिधि आए थें। उनका एक सपना है ,कि हमारा देश ,हमारे छ.ग.  के किसान भी वहां जैसे उन्नत् कृषि की तकनिकी को अपनाकर  कृषि   को  समृध्दि की ओर ले जाए ।

 

 

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